रायपुर: प्रदेश कांग्रेस कमेटी इन दिनों अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने और जल्द से जल्द सूची जारी करने के लिए कड़ी मशक्क्त कर रही है। सूत्रों की माने तो इसी हफ्ते कांग्रेस की पहली लिस्ट सामने होगी। इससे पहले अगस्त के दूसरी पखवाड़े में भाजपा ने अपने 21 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर टिकट वितरण में बाजी मार ली थी तो वही अब कांग्रेस पर दबाव बढ़ चला है कि वह पहली लिस्ट को जल्द से जल्द हरी झंडी दिलाकर उसे सामने रखे।
हालाँकि यह कांग्रेस के लिए उतना आसान नहीं है जितना कहा जा रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक़ कांग्रेस की तरफ से सभी नब्बे विधानसभाओ में करीब दो हजार कांग्रेस नेताओं ने दावेदारी ब्लॉक अध्यक्ष के सामने पेश की है। इनमे मौजूदा विधायक से लेकर अनुषांगिक संगठनों के छोटे-बड़े पदाधिकारी शामिल है। कई नेताओं ने एक से ज्यादा जगहों के लिए आवेदन दिया है तो वही पाटन और खरसिया कुछ ऐसी सीटें है जहाँ किसी सीटिंग एमएलए के अलावा कोई आवेदन ब्लॉक अध्यक्ष के पास नहीं आया। पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है। ब्लॉक अध्यक्षों ने सभी नाम जिला कांग्रेस कमेटी को भेज दिए है तो वही इसके बाद जिलाध्यक्षों ने यह नाम पीसीसी को प्रेषित किया है।
अब पेंच यही फंस गया। बताया जा रहा है कि ज्यादातर जिलों में दावेदारों के नाम पैनल के तौर पर पीसीसी को भेजा गया है जबकि कई जिलों की तरफ से पीसीसी को सिंगल नाम ही मिले है। ऐसे में अब जिन जिलाध्यक्षों ने सिंगल नाम प्रदेश कांग्रेस को भेजे है उनपर कार्रवाई हो सकती है। दरअसल जिला अध्यक्षों को कम से कम पांच नामो की अनुशंसा करनी थी लेकिन उन्होंने संभवतः दबाव में आकर अन्य नामों की अनुशंसा नहीं की। पीसीसी अब ऐसे जिला प्रमुखों पर कभी भी कार्रवाई कर सकती है। दरअसल पीसीसी की बैठक में सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि जो जिलाध्यक्ष दबाव में आएं है उन्हें चिन्हित किया जाएगा। वही प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा है अधिकांश जिलाध्यक्षों ने अच्छा काम किया है। अगर कोई जिलाध्यक्ष गलती किए हैं तो कार्रवाई होगी।