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ये खेती नहीं, खेत में उगता सोना है, एक बार लगाएं और फिर हर साल होगा डबल फायदा

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किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी की किस्मों पर भी ध्यान दे रहे हैं, जो कम जगह, कम पानी में अधिक मुनाफा दे सकें. इसी लिस्ट में ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) की खेती एक बेस्ट विकल्प बनकर उभरी है, जिसे आज के समय में’सोने से कम नहीं’ माना जा रहा है. इसके बाजार में बढ़ते रेट और बढ़ती मांग किसानों को ‘मालामाल’ करने का वादा कर रही है.वैसे भी ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसान एक बार निवेश कर कई सालों तक और हर साल कई बार फसल लेकर ‘डबल फायदा’ कमा सकते हैं.

ड्रैगन फ्रूट क्या है और क्यों है इतना खास?

ड्रैगन फ्रूट, जिसे ‘पिताया’ या हिंदी में ‘कमलम’ भी कहते हैं.ये अपने आकर्षक गुलाबी या लाल रंग की त्वचा और अंदर सफेद या लाल गूदे, जिसमें छोटे-छोटे काले बीज के लिए जाना जाता है. अब भारत सहित एशियाई देशों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.

यह इतना खास क्यों है?

ड्रैगन फ्रूट एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन (विशेषकर विटामिन सी), फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे हेल्दी तत्वों से भरपूर होता है. इसे शुगर, हार्ट और गठिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में सहायक ‘सुपरफूड’ मानते हैं. फिललाह मार्केट में यह करीब ₹200 से ₹400 प्रति किलोग्राम तक बिकता है, जो इसे पारंपरिक फलों की तुलना में काफी लाभदायक बनाता है.

ड्रैगन फ्रूट की खेती से ‘डबल फायदा’ कैसे?

ड्रैगन फ्रूट की खेती कई मायनों में किसानों के लिए ‘डबल फायदे’ का सौदा साबित हो सकती है-

  1. सालभर में कई बार फल देते है. असल में अन्य फसलों के विपरीत, ड्रैगन फ्रूट एक बार रोपण के बाद 20-25 साल तक फल देता रहता है.

इसके अलावा यह एक मौसमी फसल है जो आमतौर पर जून से अक्टूबर तक फल देती है, लेकिन सही देखभाल से एक ही सीजन में कई बार (3-5 फसल चक्र) फल दे सकता हैं. यानी किसानों को खूब फायदा मिल सकता है.

  1. आपको बता दें कि  एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती से सालाना तक से कम  10-15 टन तक उत्पादन हो सकता है.यानी किसान आसानी ड्रैगन फ्रूट की खेती से प्रति एकड़ सालाना करीब करीब ₹3 लाख से ₹8 लाख तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं, जो पारंपरिक फसलों से कहीं अधिक है.लेकिन अभी तक कुछ प्रगतिशील किसानों ने तो प्रति एकड़ करीब ₹7 लाख तक की कमाई की भी की है.

ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे करें?

  1. भूमि की तैयारी और जलवायु: ड्रैगन फ्रूट कई प्रकार की मिट्टी में उगा सकते हैं, वैसे अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है और  इसे गर्म और आर्द्र जलवायु पसंद है, लेकिन यह सूखे को भी सहन कर सकता है.
  2. कटिंग से रोपण: इसे बीज और कलम दोनों से उगा सकते हैं, लेकिन कलम (कटिंग) विधि अधिक सफल मानी जाती है क्योंकि इससे कम समय में फल मिलते हैं (लगभग 1-2 साल में).हमेशा किसान स्वस्थ और रोग-मुक्त पौधे से 20-30 सेमी लंबी कटिंग लें.
  3.  सिंचाई और पोषण: ड्रिप सिंचाई प्रणाली का यूज करना सबसे अच्छा है क्योंकि यह पानी की बचत करती है और जड़ों में जलभराव को रोकती है.वैसे जैविक खाद और उर्वरकों का नियमित प्रयोग करना चाहिए.किसान कीटों और बीमारियों की निगरानी करें, हालांकि ड्रैगन फ्रूट आमतौर पर काफी प्रतिरोधी होता है.

आय की कैसे होती है संभावना

आपको बता दें कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में शुरुआती लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है. इसका एक पौधा ₹100-1000 तक का हो सकता है.यानी एक एकड़ में लगभग ₹4-5 लाख तक का निवेश आ सकता है. लेकिन इसमें पहले साल में मामूली उत्पादन  हो सकता है, और तीसरे-चौथे साल तक खूब फल मिल सकता है जिसमें एक एकड़ से सालाना 10-15 टन तक फल मिल सकते हैं.मार्केट मूल्य अगर ₹200-400 प्रति किलोग्राम के करीब होगी तो उस हिसाब से, प्रति एकड़  सालाना करीब ₹20 लाख से ₹40 लाख तक कमाया जा सकता है.जिसमें शुद्ध लाभ सभी खर्चों को घटाने के बाद ₹3-8 लाख तक हो सकता है.हालांकि कमाई को लेकर हम कोई मुहर नहीं लगा रहे हैं.

सरकारी सहायता और सब्सिडी

वैसे भारत सरकार ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)’ योजना के तहत ड्रैगन फ्रूट (कमलम) की खेती को बढ़ावा दे रही है.इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दे रही हैं. उदाहरण के लिए, बिहार सरकार ‘ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ के तहत करीब 21 जिलों में किसानों को करीब 40% तक सब्सिडी दे रही है.  उत्तर प्रदेश सरकार करीब ₹2.5 लाख तक और गुजरात सरकार प्रति हेक्टेयर ₹3 लाख तक की सहायता प्रदान कर रही है

(नोट-खबर केवल जानकारी के लिए है, खेती कैसे करना और करना है कि नहीं ये किसान के ऊपर है)