मुंबई: मालेगांव विस्फोट कांड की जांच करने वाली एटीएस टीम का हिस्सा रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी महबूब मुजावर ने एनआइए कोर्ट को बताया है कि उन्हें उस टीम में रहते हुए कुछ ऐसे काम करने को कहा गया, जिनका मालेगांव कांड से कोई वास्ता ही नहीं था।
मुजावर कहते हैं कि रामजी कालसंगरा और संदीप डांगे की जगह साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित (अब सेवानिवृत्त) का नाम आरोपित के रूप में शामिल कर एक फर्जी जांच शुरू की गई। वह एटीएस के तत्कालीन उपप्रमुख परमबीर ¨सह की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि एक ‘गलत व्यक्ति’ के द्वारा की गई ‘गलत जांच’ का परिणाम आज सामने आ गया है।
इसी कड़ी में मुजावर कहते हैं कि उन्हें इसी मामले में उनके अधिकारियों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत तो गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। न मानने पर मुझे ही निलंबित कर कुछ झूठे मामलों में फंसा दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि अपने मामले की जांच के दौरान ही उन्होंने मालेगांव कांड में चल रही फर्जी जांच के दस्तावेज एनआइए कोर्ट को सौंप दिए थे। अब उन्हें इंतजार है कोर्ट द्वारा उनके दस्तावेजों पर की गई टिप्पणी का।




