नई दिल्ली : पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध भी कहते हैं, हिंदू धर्म में इसका बहुत बड़ा महत्व है। यह16 दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए विभिन्न तरह के धार्मिक अनुष्ठान का पालन करते हैं। यह समय पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए खास होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान हमें क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए?
पितृ पक्ष में क्या करें?
- जिस तिथि पर आपके पूर्वज का निधन हुआ था। उस दिन उनका श्राद्ध करें।
- श्राद्ध में पिंडदान, तर्पण, और ब्राह्मण भोज कराना जरूरी होता है।
- तर्पण में काले तिल, जौ, और जल से पितरों को अर्घ्य दिया जाता है।
- यह क्रिया हर दिन करनी चाहिए।
- श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
- अगर ब्राह्मण उपलब्ध न हों, तो आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति या गाय को भोजन करा सकते हैं।
- पितृ पक्ष के दौरान दान का बहुत महत्व है।
- ऐसे में अन्न, वस्त्र, जूते, और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करें, इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
- इस दौरान घर में सात्विक और पवित्र वातावरण बनाए रखें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
पितृ पक्ष में क्या न करें?
- पितृ पक्ष में तामसिक भोजन, विशेष रूप से मांस और शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
- इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए।
- कुछ मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के 15 दिनों में बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए।
- नए कपड़े, गहने या अन्य कोई भी नई वस्तु खरीदने से बचना चाहिए।
- भोजन में लहसुन और प्याज का उपयोग नहीं करना चाहिए।
- घर में शांति बनाए रखना चाहिए।
- किसी से भी बहस या झगड़ा करने से बचें।




