धान की खेती करने वाले किसानों के लिए बरसात के मौसम में फंगस सबसे बड़ा खतरा बन जाता है. अगर बासमती धान के पौधों के तनों पर सफेद या गुलाबी रुई जैसा फफूंद दिखाई दे, तो समझ लीजिए कि फसल पर इस खतरनाक रोग का हमला हो गया है.
बासमती धान की रोपाई को लगभग 2 महीना बीत चुका है, यह समय फसल की बढ़वार के लिहाज़ से बेहद अहम होता है. इस चरण पर पौधों को संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है. अगर किसान सही देखभाल करें तो पौधे मज़बूत बनते हैं और आगे चलकर पैदावार भी दोगुनी हो सकती है. इस समय किसानों को बासमती धान की फसल पर रोजाना नजर रखनी चाहिए, क्योंकि कई बार धान के पौधे की पत्तियों पर कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें किसान नजरअंदाज कर देते हैं. जिसकी वजह से कई बार फसल को नुकसान भी हो जाता है. तापमान में आ रहे उतार-चढ़ाव की वजह से धान की फसल में बकानी रोग के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं. जिसको लेकर किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है.
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि जिन किसानों ने बासमती धान की फसल की रोपाई की थी, उन किसानों को फसल पर विशेष नजर रखने की जरूरत है. अगर बासमती धान के पौधे की पत्तियों पर पीलापन दिखाई दे रहा है, पतियों के किनारे सूख रहे हैं, तना पतला और कमजोर हो रहा है तो किसानों को सतर्क हो जाने की जरूरत है. क्योंकि यह बकानी रोग के लक्षण हो सकते हैं.
इन लक्षणों को न करें नजरंदाज
धान की फसल में बकानी रोग लगते ही पौधे की जड़ें सूखने लगती हैं और पौधा पोषक तत्वों को अच्छे से ग्रहण नहीं कर पाता. पौधे के तने के नीचे की गांठों से जड़ निकलने लगती है. सफेद और गुलाबी रंग की फफूंदी भी दिखाई देती है. इन लक्षणों को देखकर किसानों को तुरंत रोक नियंत्रण के लिए उपाय कर लेने चाहिए.
धान की फसल में बकानी रोग लगते ही पौधे की जड़ें सूखने लगती हैं और पौधा पोषक तत्वों को अच्छे से ग्रहण नहीं कर पाता. पौधे के तने के नीचे की गांठों से जड़ निकलने लगती है. सफेद और गुलाबी रंग की फफूंदी भी दिखाई देती है. इन लक्षणों को देखकर किसानों को तुरंत रोक नियंत्रण के लिए उपाय कर लेने चाहिए.
करें 250 ग्राम इस दवा का छिड़काव?
एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे तो किसानों को धान की रोपाई के वक्त ही इस रोग से फसल को बचाने के लिए उपाय कर लेने चाहिए, क्योंकि यह फफूंदी जनित रोग होता है. लेकिन अगर खड़ी फसल में अब यह लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो किसानों की शुरुआती दिनों में ही रोकथाम के लिए प्रभावी नियंत्रण के लिए रासायनिक घोल का छिड़काव करना चाहिए. किसान थायोफिनेट मिथाइल (Thiophanate-methyl) की 250 ग्राम मात्रा लेकर 130 से 140 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर दें. ऐसा करने से फंगस जनित रोग की रोकथाम हो जाएगी.
एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे तो किसानों को धान की रोपाई के वक्त ही इस रोग से फसल को बचाने के लिए उपाय कर लेने चाहिए, क्योंकि यह फफूंदी जनित रोग होता है. लेकिन अगर खड़ी फसल में अब यह लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो किसानों की शुरुआती दिनों में ही रोकथाम के लिए प्रभावी नियंत्रण के लिए रासायनिक घोल का छिड़काव करना चाहिए. किसान थायोफिनेट मिथाइल (Thiophanate-methyl) की 250 ग्राम मात्रा लेकर 130 से 140 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर दें. ऐसा करने से फंगस जनित रोग की रोकथाम हो जाएगी.




