नई दिल्ली : सनातन धर्म में भाद्रपद का महीना बेहद खास माना जाता है। इस माह के कृष्ण पक्ष में जगत के पालनहार भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वहीं, शुक्ल पक्ष में राधा रानी का अवतरण दिवस मनाया जाता है। साथ ही भाद्रपद महीने में गणेश महोत्सव भी मनाया जाता है। इसके अलावा, भाद्रपद महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है। आइए, परिवर्तिनी एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व जानते हैं-
- एकादशी तिथि का आरंभ – 03 सितंबर को देर रात 03 बजकर 53 मिनट पर
- एकादशी तिथि का समापन- 04 सितंबर को सुबह 04 बजकर 21 मिनट पर
कब मनाई जाएगी परिवर्तिनी एकादशी?सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। आसान शब्दों में कहें तो सूर्योदय के बाद से तिथि की गणना होती है। हालांकि, प्रदोष और निशा काल में होने वाली पूजा के लिए उदया तिथि से गणना नहीं होती है। इस प्रकार 03 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी मनाई जाएगी।
- सूर्योदय – सुबह 06 बजे से…
- सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 40 मिनट पर
- चन्द्रोदय- शाम 03 बजकर 51 मिनट पर
- चंद्रास्त- देर रात 02 बजकर 07 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 30 मिनट से 05 बजकर 15 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 40 मिनट से 07 बजकर 03 मिनट से
- निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक




