राज्यों में संगठन को दुरूस्त करने की कसरत में जुटी कांग्रेस को ओडिसा में बीजू जनता दल के गिरते ग्राफ के बीच भविष्य की सत्ता सियासत में वापसी का मौका नजर आ रहा है। पार्टी इसके मद्देनजर जहां ओडिसा में संगठन को धारदार बनाने के लिए व्यापक पुनर्गठन की अभियान शुरू कर चुकी है तो तो दूसरी ओर बीजद से विपक्षी दल की केंद्रीय भूमिका छीनने की कोशिश में जुटी है।
ओडिसा की भाजपा सरकार की नीतियों तथा कानून व्यवस्था के खिलाफ जमीनी आंदोलनों के बाद विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की कांग्रेस की पहल इसी रणनीति का हिस्सा है।
साथ ही कांग्रेस ऐसे तमाम राजनीतिक दांव चल रही जिससे भाजपा और बीजद को सियासी सिक्के का एक ही पहलू साबित करने का राज्य में नैरेटिव बनाया जा सके। कांग्रेस हाईकमान लगातार सीधे ओडिसा में संगठन सृजन से लेकर सियासी अभियानों के इन कदमों की सीधे समीक्षा कर रहा है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पिछले हफ्ते ओडिसा का दौरा किया और सोमवार को दिल्ली में संगठन सृजन के लिए भेजे गए केंद्रीय पर्यवेक्षकों से चर्चा कर सूबे में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में जान फूंकने की हाईकमान की तत्परता का संदेश दिया।
अविश्वास प्रस्ताव के इस दांव से पहले इसी महीने हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजद के ”तटस्थ” रहते हुए वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने के बाद कांग्रेस को राज्य में विपक्ष की मुख्य भूमिका में लौटने की संभावनाएं नजर आ रही हैं।
इसीलिए उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजद ने तटस्थता दिखाई तो कांग्रेस ने इसे भाजपा के समर्थन के रूप में ही पेश करने के बाद पिछले हफ्ते विधानसभा में मांझी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। साथ ही कांग्रेस के सभी 14 विधायक नवीन पटनायक के दफ्तर में समर्थन मांगने पहुंच गए मगर वे नहीं मिले।
केसी वेणुगोपाल पिछले हफ्ते संगठन को दुरूस्त करने की इस कसरत का जायजा लेने ही ओडिसा गए थे तो सोमवार को दिल्ली में बैठकों का दौर किया। बैठकों के बाद वेणुगोपाल ने एक्स पर पोस्ट में कहा भी कि जिला और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत कर राज्य में निर्णायक भूमिका निभाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।




