नई दिल्ली : पाकिस्तान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर को असीमित शक्तियां देने के लिए संविधान में संशोधन किया जा रहा है। संसद के ऊपरी सदन सीनेट में शनिवार को 27वां संविधान संशोधन बिल पेश कर दिया गया। इस बिल के जरिये अति महत्वपूर्ण अनुच्छेद 243 में बदलाव किया जाना है, जिसके बाद जनरल मुनीर पाकिस्तान के दूसरे सबसे ताकतवर अधिकारी बन जाएंगे।
सेना के तीनो अंगों की एकीकृत कमान के प्रमुख का पद भी उनके पास होगा। माना जा रहा है कि इससे वह राष्ट्रपति के समकक्ष हो सकते हैं। संविधान संशोधन को खतरनाक बताते हुए विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। देशभर में रविवार को प्रदर्शन हुए। विपक्ष का आरोप है कि इस संशोधन से संविधान का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस संशोधन से सुप्रीम कोर्ट की हैसियत घट जाएगी। संशोधन के बाद सर्वोच्च न्यायिक मंच का स्थान प्रस्तावित संघीय संवैधानिक न्यायालय (एफसीसी) ले लेगा। हालांकि, डॉन अखबार के मुताबिक संविधान संशोधन के समर्थकों का कहना है कि बदलाव से न्यायपालिका का आधुनिकीकरण होगा, लंबित मामले घटेंगे और संविधान और अपीलीय क्षेत्राधिकार अलग-अलग होंगे। इससे न्याय प्रणाली में दक्षता और स्पष्टता बढ़ेगी।
अनुच्छेद 175ए में संशोधन से एफसीसी के मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट से ऊपर कर दिया जाएगा। उनका कार्यकाल भी लंबा होगा और सेवानिवृत्ति की आयु 68 वर्ष होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 65 वर्ष है।
- चीफ आफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) का नया पद सृजित होगा
- सीडीएफ एकीकृत कमान का प्रमुख होगा, ताकि सेना के तीनों अंगों में बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
- थल सेना अध्यक्ष (सीओएएस) के पास ही सीडीएफ का भी अधिकार होगा। सीडीएफ ही तीनों सेनाओं (थल सेना, नौ सेना और वायु सेना) का प्रमुख होगा।
- फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स, एडमिरल ऑफ द फ्लीट 5-स्टार अधिकारी होंगे। 5-स्टार रैंक वाले अधिकारियों के पास ये रैंक, सुविधाएं और वर्दी ताउम्र बरकरार रहेगी।
- सीएनएससी के पास परमाणु हथियारों और रणनीतिक संपत्ति की देखरेख का जिम्मा होगा।
- प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के प्रमुखों की नियुक्ति करेंगे।
- कमांडर ऑफ नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड (सीएनएससी) का नया पद बनेगा। चेयरमैन, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) का पद खत्म होगा।




