रायपुर : प्रदेश में प्राचार्य पदोन्नति काफी चर्चा का विषय है। राज्य बनने के 25 साल बाद एलबी संवर्ग तो इस प्रकिया का पहली बार हिस्सा बन रहा है। गजेंद्र यादव के स्कूल शिक्षा मंत्री बनने के बाद उनके नेतृत्व में विभाग की यह पहली बड़ी पहल है..। उन्होंने इस पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर पत्रकारों को बताया था कि प्राचार्य पदोन्नति पिछले तेरह साल यह से लंबित रही है। अब यह विष्णुदेव जी के सुशासन में पूरी हो रही है और आगे भी इसी तरह से विभाग का कार्य जारी रहेगा…।
बताते चले कि यह तथ्य निर्विवाद है कि व्याख्याता एलबी ही एकमात्र ऐसा पद रहा है, जिसे शिक्षाकर्मी व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक पदोन्नति का अवसर नहीं मिला। वहीं एलबी संवर्ग के ही सहायक शिक्षक व्याख्याता तक पदोन्नत होकर आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन व्याख्याता एलबी की स्थिति जस की तस बनी रही। इस पद में पदोन्नति संबंधी विसंगति पिछले 25 सालों में दूर नहीं हो पाई थी। व्याख्याता एलबी एक ही पद पर बने हुए थे।
पिछली सरकार ने संविलियन के बाद वन टाइम रिलैक्सेशन देते हुए सहायक शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर दिया था।लेकिन व्याख्याताओं को नजर अंदाज कर दिया था। अब लगभग 13 साल बाद पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे पूर्व नियमित शिक्षक भी अब पदोन्नत हो रहे हैं। टी संवर्ग में यह प्रकिया पूरी हो चुकी है। इसमें संविलियन के बाद पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके एलबी शिक्षक भी इस पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल हैं।
अनिल शुक्ला ने बताया कि प्राचार्य पदोन्नति फोरम के साथ वर्षो से संघर्ष कर रहे राकेश शर्मा, आर के झा, श्याम कुमार वर्मा और मलखम वर्मा ने 19 नवंबर की सुबह 9 बजे प्रदेश के शिक्षा मंत्री से दुर्ग निवास में विस्तृत चर्चा की थी। इसी संवाद के बाद चार दिनों में काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्ण करने का मार्ग साफ हुआ और उसी अनुसार आज पहले दिन की काउंसलिंग संपन्न हुई।
उन्होंने कहा कि प्रधान पाठक माध्यमिक विद्यालय के साथियों के लिए प्राचार्य बनना लगभग असंभव माना जा रहा था, लेकिन सपनों को साकार होते देखकर ऐसा लगा मानो 39 वर्षों की सेवा पूरी होने से पहले प्राचार्य बनाने का संकल्प पूरा हो गया हो। सभी पदोन्नत साथियों को उन्होंने पुनः बधाई दी। साथ ही काउंसलिंग के नोडल अधिकारी आर एल ठाकुर, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग दुर्ग को काउंसलिंग स्थल पर पूरी पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया संचालित करने के लिए धन्यवाद दिया।




