Home देश 1800 पेड़ों ने नासिक महाकुंभ की तैयारियों पर लगाया ब्रेक, क्या है...

1800 पेड़ों ने नासिक महाकुंभ की तैयारियों पर लगाया ब्रेक, क्या है पूरा मामला?

16
0

नासिक :- दो साल बाद 2027 में महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में ‘सिंहस्थ कुंभ मेला’ आयोजित किया जाएगा. देवेंद्र फडणवीस की सरकार नासिक कुंभ की तैयारी में जोर-शोर से जुटी है. पिछले साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ की सफलता के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य नासिक कुंभ मेला को पूरी तरह से सफल बनाना है, लेकिन कुंभ मेले से पहले 1800 पेड़ की कटाई को लेकर विवाद पैदा हो गया है.

नासिक के तपोवन में साधुग्राम के निर्माण हेतु 1800 वृक्षों की कटाई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. कोर्ट ने राज्य सरकार, नासिक नगर निगम और वृक्ष प्राधिकरण को नोटिस जारी कर मौखिक रूप से निर्देश दिया है कि वे पेड़ों की कटाई शुरू न करें. इससे देवेंद्र फडणवीस सरकार को झटका लगा है. पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों के कड़े विरोध के बीच यह कानूनी लड़ाई अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है.

जानें क्या है मामला:- तपोवन, रामकुंड से लगभग 3 किलोमीटर दूर है, जहां मेले के दौरान भक्त गोदावरी में डुबकी लगाते हैं. आम मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने अपने वनवास का कुछ हिस्सा नासिक, खासकर तपोवन में बिताया था.

पिछले मेलों में भी तपोवन का इस्तेमाल साधुओं के रहने की जगह बनाने के लिए किया गया था और शहर के डेवलपमेंट प्लान में इसे आधिकारिक तौर पर साधुग्राम के नाम से जाना जाता है. मेलों के बीच तपोवन अब तक खाली पड़ा है. ये पेड़ करीब दस साल पहले उगे थे, जब शहर प्लॉट के किनारों तक फैल गया था और नासिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) ने कब्जा रोकने के लिए पेड़ लगाए थे. समय के साथ, तपोवन नासिक के लिए एक जरूरी शहरी इलाका बन गया.

महाराष्ट्र में पेड़ काटने के क्या हैं नियम:- महाराष्ट्र फेलिंग ऑफ ट्रीज (रेगुलेशन) एक्ट, 1964 के तहत यह नियम बनाए गए हैं कि राज्य में पेड़ कैसे और कब काटे (काटे) जा सकते हैं. इसमें कहा गया है कि आप अधिकारियों की इजाजत के बिना कुछ पेड़ों को नहीं काट सकते. इजाजत के बिना पेड़ काटना गैर-कानूनी है और इसके लिए सजा हो सकती है. यह एक्ट के तहत लोकल ट्री ऑफिसर और अधिकारियों से इसकी इजाजत लेनी होती है. नियम के अनुसार पानी की जगहों (जैसे नदियां, झरने, टैंक) के 30 मीटर के अंदर, आप आम तौर पर कलेक्टर की मंजूरी के बिना पेड़ नहीं काट सकते. इसी तरह से कुछ ऐसी जमीनों पर जहां खेती नहीं हो सकती और पेड़ कम हैं, वहाँ भी काटने से पहले आपको इजाजत लेनी होगी.

अगर बिना इजाजत के कोई पेड़ काटा जाता है, तो कॉर्पोरेशन लगभग 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगा सकता है और क्रिमिनल केस सहित कानूनी कार्रवाई कर सकता है.कुंभ से जुड़े डेवलपमेंट के लिए तपोवन में पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि नासिक इलाके में कोई भी पेड़ उसकी पहले से इजाजत के बिना नहीं काटा जाना चाहिए. इसके साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने नासिक के कुछ हिस्सों में पेड़ काटने पर तब तक रोक लगाने का आदेश दिया जब तक कि सही कानूनी प्रोसेस का पालन नहीं किया जाता.