वैदिक पंचांग के अनुसार, शनिवार 03 जनवरी को पौष माह की पूर्णिमा तिथि है। यह दिन बेहद खास होता है। इस शुभ अवसर पर गंगा समेत उनकी सहायक नदियों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद विधि विधान से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करते हैं।
ज्योतिषियों की मानें तो पौष पूर्णिमा के दिन ब्रह्म और इंद्र समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक के घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आएगी। आइए, योग, महत्व और मंत्र जानते हैं-
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।
3. ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।
4. ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
5. ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः ।
ॐ क्लीन क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी देव्यै नमः ।।




