वैदिक पंचांग के अनुसार, रविवार 04 जनवरी को पौष पूर्णिमा है। इसके अगले दिन से माघ महीने की शुरुआत होगी। पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करते हैं। इसके बाद लक्ष्मी नारायण जी की भक्ति भाव से पूजा करते हैं। इसके अलावा, पौष पूर्णिमा पर दान-पुण्य भी किया जाता है।
माघ माह में कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। इनमें कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाएगी। यह दिन काल भैरव देव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव देव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही मनचाहा वरदान पाने के लिए व्रत भी रखा जाता है। आइए, माघ माह की कालाष्टमी के बारे में सबकुछ जानते हैं-
- सूर्योदय – सुबह 07 बजकर 15 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 42 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 13 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 39 मिनट से 06 बजकर 07 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त- रात 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक
काल भैरव देव मंत्र1. ॐ नमो भैरवाय स्वाहा।
2. ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय भयं हन।
3. ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय शत्रु नाशं कुरु।
4. ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय तंत्र बाधाम नाशय नाशय।
5. ॐ भं भैरवाय आप्द्दुदारानाय कुमारं रक्ष रक्ष।




