मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील में रहने वाले किसान ने एक ऐसी खेती का अनुभव साझा किया है, जो धैर्य रखने वाले किसानों के लिए भविष्य में लाखों रुपये की आमदनी का साधन बन सकता है. यह खेती है सागवान (सागौन) के पेड़ों की. स्थानीय किसान बलराम शर्मा ने कहा कि अगर किसी किसान के पास 10 से 15 साल का समय है और वह लंबी अवधि की योजना बना सकता है, तो सागवान की खेती उसके लिए सक्सेस का आइडिया साबित हो सकती है. वह बताते हैं कि सागवान की खेती में सबसे बड़ी शर्त धैर्य है. यह कोई ऐसी फसल नहीं है, जिससे हर साल आमदनी हो लेकिन जो किसान समय दे पाते हैं, उनके लिए यह भविष्य में बड़ी कमाई का रास्ता खोल देती है.
सागवान के पेड़ धीरे-धीरे बढ़ते हैं और लगभग 10 से 15 साल में अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी देने लगते हैं. इसके बाद किसान को एकमुश्त बड़ी रकम मिल सकती है, जिसे आम बोलचाल में बल्ले-बल्ले कहा जाता है.
पेड़ लगाने का तरीका
उन्होंने आगे कहा कि सागवान का पेड़ लगाने के लिए सबसे बढ़िया समय मानसून की शुरुआत यानी जून–जुलाई माना जाता है. इस समय मिट्टी में नमी होती है, जिससे पौधा आसानी से जम जाता है. रोपाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर लें और पुरानी फसल के अवशेष हटा दें. करीब एक महीने पहले 45–60 सेमी गहरे और चौड़े गड्ढे खोदें. गड्ढों में गोबर की सड़ी खाद और थोड़ा कीटनाशक मिलाएं. पौधों को 8 से 10 फीट की दूरी पर लगाएं. शुरुआती कुछ महीनों में नियमित पानी दें और अच्छी बढ़वार के लिए नीचे की बेकार टहनियों की छंटाई करते रहें.
बाजार में मिलता अच्छा खासा पैसा
सागवान की लकड़ी की बाजार में भारी मांग रहती है. इसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹105 प्रति यूनिट से बताई जाती है, जो गुणवत्ता, मोटाई और उम्र के अनुसार कई गुना बढ़ सकती है. यही कारण है कि इसे हरित सोना भी कहा जाता है. सही देखभाल और उपयुक्त जमीन पर उगाए गए सागवान के पेड़ किसान की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं.
सागवान की लकड़ी क्यों है खास?
सागवान की लकड़ी खास इसलिए मानी जाती है क्योंकि यह मजबूत, टिकाऊ और कीट व पानी प्रतिरोधी होती है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल प्रीमियम श्रेणी के कामों में किया जाता है. सागवान से बनने वाला फर्नीचर वर्षों तक खराब नहीं होता और इसकी चमक और मजबूती बनी रहती है. यही कारण है कि अमीर वर्ग और बड़े प्रोजेक्ट्स में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.
सागवान की लकड़ी के मुख्य उपयोग
सागवान की लकड़ी से बिस्तर, कुर्सी, मेज, सोफा जैसे उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर बनाए जाते हैं. इसके अलावा दरवाजे, खिड़कियों के फ्रेम, फर्श (फ्लोरिंग) और घर की अंदरूनी पैनलिंग में भी इसका व्यापक उपयोग होता है. परिवहन के क्षेत्र में नावों और जहाजों के डेक, ढांचे और रेलगाड़ियों के डिब्बे बनाने में सागवान का इस्तेमाल किया जाता है.




