कोयला तस्करी की काली कमाई और I-PAC का कनेक्शन
ED ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में हुए 2,742.32 करोड़ रुपये के विशाल कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले के तार अब सीधे ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (I-PAC) से जुड़ रहे हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस घोटाले की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा, जो करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक है, हवाला चैनलों के जरिए I-PAC तक पहुँचाया गया। इसी इनपुट के आधार पर 8 जनवरी 2026 को ED ने I-PAC के दफ्तर और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी। ED का मानना है कि यह पैसा चुनावों को प्रभावित करने और अवैध राजनैतिक फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया गया था।
मुख्यमंत्री पर रेड रोकने और ‘डकैती’ के गंभीर आरोप
ED की याचिका में जो सबसे सनसनीखेज खुलासा हुआ है, वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर है। केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि जब उनके अधिकारी प्रतीक जैन के घर पर तलाशी ले रहे थे, तब सीएम ममता बनर्जी खुद 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुँच गईं। आरोप है कि मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस ने मिलकर जांच को पटरी से उतारने की कोशिश की। ED ने यहाँ तक कहा कि पुलिस ने उनके अधिकारियों को धमकाया और जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन छीन लिए। लगभग दो घंटे तक ये सबूत पुलिस कस्टडी में रहे, जिससे उनके साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किए जाने की पूरी आशंका है। ED ने इसे सरकारी कार्य में बाधा और सबूत मिटाने का संज्ञेय अपराध बताया है।
CBI जांच की मांग और थानों में दर्ज FIR पर घमासान
इस टकराव के बाद कोलकाता के अलग-अलग थानों में ED अधिकारियों के खिलाफ ही चार FIR दर्ज कर दी गईं। ED ने इसे ‘प्रतिशोधात्मक कार्रवाई’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से अपने अधिकारियों के लिए सुरक्षा की मांग की है। एजेंसी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर की भूमिका की जांच CBI से कराई जाए। वहीं दूसरी तरफ, I-PAC ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर किसी भी चुनावी डेटा की जब्ती से इनकार किया है और खुद को बेकसूर बताया है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या बंगाल में एक बार फिर केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच ‘आर-पार’ की जंग छिड़ने वाली है।




