फिलहाल विश्वविद्यालय में जांच समिति गठित कर दी गई है, जो एक हफ्ते के भीतर अपनी जांच पूरी करेगी। साथ ही विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नोटिस जारी कर तमाम प्रकार की फीस ऑनलाइन या फिर यूपीआई के जरिए जमा करने के आदेश दिए हैं।
2022 से 2025 में हुई अनियमितताएं
मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025 के मध्य ऐसी अनियमितताएं हुई हैं। जांच में यह पाया गया कि शोधार्थियों ने अपनी फीस का भुगतान तो किया, जिसके बदले उन्हें विश्वविद्यालय की आधिकारिक दिखने वाली रसीदें भी दी गईं, लेकिन वह राशि कभी विश्वविद्यालय के मुख्य बैंक खाते में जमा ही नहीं हुई। फर्जी रसीदों के माध्यम से पैसा बीच में ही गायब कर दिया गया। शोधार्थियों द्वारा दिखाई गई रसीदों का खातों और रजिस्टर से मिलान किया गया, तो फर्जीवाड़ा सामने आया।जिन शोधार्थियों ने फीस जमा कर दी थी, उनके पास बकायदा रसीद तो है, लेकिन उनके आगे के प्रोसेस को लेकर संशय बना हुआ है। वहीं कुछ शोधार्थियों के अवॉर्ड भी हो चुके हैं, जबकि कुछ ने देरी को देखते हुए दोबारा फीस जमा कर दी है।
फीस ऑनलाइन जमा करने के आदेश
विश्वविद्यालय के कुलपति ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पदभार ग्रहण करने के बाद रिकॉर्ड खंगालने पर यह मामला उजागर हुआ है, जिसके लिए एक जांच समिति गठित की गई है।जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी हो जाएगी, जिसके बाद विश्वविद्यालय कार्रवाई करेगा। वहीं घोटाले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नोटिस जारी कर सभी प्रकार की फीस ऑनलाइन या फिर यूपीआई के जरिए जमा करने के आदेश दिए हैं।




