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कैसे बन गए शंकराचार्य…24 घंटे में दें जवाब, अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्राधिकरण का नोटिस

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प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुए विवाद कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, अविमुक्तेश्वरानंद ने तब से ही अपने शिविर के बाहर बैठकर विरोध दर्ज कर रहे हैं.
इस बीच अब मेला प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस भेजा गया है जिसमें उनके अपने नाम के आगे शंकराचार्य लिखने पर आपत्ति जताई गई है.

सोमवार रात कल रात 12:00 बजे प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कैम्प में स्थानीय कानूनगो यह पत्र लेकर रिसीव करने पहुंचा था जो की उनके शिष्यों ने रिसीव नहीं किया और कहा कि सही समय पर लेकर आएं. इस नोटिस में कहा गया है कि उन्हें शंकराचार्य नहीं कहा जा सकता.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा नोटिस

मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जो नोटिस भेजा है उसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मामले का जिक्र करते हुए 24 घंटे में नोटिस का जवाब देने को कहा है. मेला प्राधिकरण ने पूछा है कि आप अपने नाम के आगे शंकराचार्य किस प्रकार लिख रहे हैं. जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के संबंध में पारित नहीं होता तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं गया है.

शंकराचार्य लिखने पर उठाए सवाल

प्रशासन ने सवाल किया कि बावजूद इसके माघ मेले 2026 में आपके द्वारा अपने शिविर पर लगाए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित या प्रदर्शित किया गया है. जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना दर्शित हो रही हैं. प्रशासन ने 24 घंटे के अंदर उनसे जवाब मांगा है कि आप अपने नाम के आगे शंकराचार्य शब्द का प्रयोग और स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य कैसे प्रचारित कर रहे हैं.