यदि आप भी इस बात को सही मान बैठे हैं तो रुकिए! आज हम आपको कुछ ऐसा बताने वाले हैं, जिसे जानने के बाद गोल्ड को लेकर आपकी सोच और भविष्य की चाल पूरी तरह बदल सकती है. तो चलिए जान लेते हैं.
स्विट्ज़रलैंड में करीब 3,70,000 पुराने परमाणु बंकर मौजूद हैं, जो शीत युद्ध के दौर के हैं. अब इनमें से ज्यादातर बंकर बेकार पड़े हैं, लेकिन उनमें से एक बंकर के अंदर आजकल कुछ ऐसा चल रहा है, जो होश उड़ा देने वाला है. इस बंकर में हर सप्ताह एक टन से ज्यादा सोना पहुंचाया जा रहा है. यह हाई-सिक्योरिटी वॉल्ट क्रिप्टो वर्ल्ड की दिग्गज कंपनी टेथर होल्डिंग्स एसए (Tether Holdings SA) के कंट्रोल में है. बैंकों और सरकारों को छोड़ दें तो यह दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात निजी गोल्ड भंडार माना जा रहा है.
सोने को भौतिक रूप में अपने पास रखना टेथर के लिए बेहद जरूरी है. क्यों जरूरी है, इसकी डिटेल आगे दी गई है. सोने की सुरक्षा के लिहाज से कंपनी ने स्विट्ज़रलैंड के पुराने परमाणु बंकर में सोना रखा हुआ है. इन बंकरों में मोटे स्टील के दरवाजों की कई परतों में जबरदस्त सिक्योरिटी है. कंपनी के सीईओ इसे मजाकिया अंदाज में ‘जेम्स बॉन्ड जैसी जगह’ बताते हैं.
टेथर ने दम-खम से ठोकी ताल
पिछले एक साल में टेथर ने चुपचाप वैश्विक सोना बाजार में पूरे दम-खम से अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है. क्रिप्टोकरेंसी और सोने में निवेश करने वालों की सोच एक जैसी है, क्योंकि दोनों ही सरकारों के बढ़ते कर्ज और वित्तीय नीतियों पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते.
इसे थोड़ा विस्तार से समझना चाहिए. दरअसल, सरकारें जब लगातार कर्ज बढ़ाती हैं और खर्च पूरा करने के लिए ज्यादा पैसा छापती हैं, तो आम निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. उन्हें डर रहता है कि इससे महंगाई बढ़ेगी, मुद्रा की कीमत गिरेगी और उनकी बचत की ताकत घट जाएगी. यही सोच क्रिप्टो निवेशकों में भी देखने को मिलती है, जो पारंपरिक बैंकिंग और सरकारी सिस्टम पर कम भरोसा करते हैं. इसी कारण लोग अपनी पूंजी को ऐसी संपत्ति में लगाने लगे हैं, जो सरकार के फैसलों से कम प्रभावित हो और लंबे समय तक मूल्य बनाए रख सके. सोना इसी वजह से सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
जैसे-जैसे बड़ी संख्या में निवेशक सोना खरीदने लगे, उसकी मांग तेजी से बढ़ी और कीमतें ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गईं. पहली बार सोने का भाव 5,200 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया, जो इस बात का संकेत है कि वैश्विक बाजार में सुरक्षित निवेश की भूख बहुत तेज हो चुकी है. इस तेजी को और मजबूती टेथर जैसी बड़ी कंपनी की भारी खरीदारी से मिली है. जब कोई संस्था लगातार टनों के हिसाब से सोना खरीदती है, तो बाजार में उपलब्ध मात्रा घट जाती है और दाम ऊपर चले जाते हैं. इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने की कीमतों में आई इस बड़ी उछाल के पीछे टेथर की सक्रिय खरीदारी भी एक महत्वपूर्ण कारण रही है.
HSBC के दो धुरंधरों ने जॉइन की टेथर
हालांकि कंपनी की आंतरिक रणनीति को लेकर बाजार में अभी भी रहस्य बना हुआ है. पिछले साल जब एचएसबीसी होल्डिंग्स (HSBC Holdings) के 2 सीनियर गोल्ड ट्रेडर्स ने नौकरी छोड़ी, तो पूरी इंडस्ट्री में अटकलें तेज थीं कि वे कहां जाएंगे? किस कंपनी में जॉइन करेंगे? बहुत कम लोगों ने अनुमान लगाया था कि उनका अगला ठिकाना टेथर हो सकता है. इससे यह संकेत मिला कि कंपनी अब पारंपरिक बुलियन बाजार में भी गंभीर खिलाड़ी बन चुकी है.
बनेंगे दुनिया के सबसे बड़े सेंट्रल गोल्ड बैंक: CEO
ब्लूमबर्ग को दिए गए एक इंटरव्यू में टेथर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पाओलो अर्दोइनो (Paolo Ardoino) ने कंपनी की भूमिका की तुलना केंद्रीय बैंक से की. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भविष्य में डॉलर के मुकाबले सोने से समर्थित नई करेंसी पेश कर सकते हैं. अर्दोइनो के अनुसार, टेथर अपने भारी मुनाफे का बड़ा हिस्सा लगातार सोने में लगाएगी और अब बैंकों की तरह मेटल ट्रेडिंग में भी उतर रही है. उन्होंने कहा, “हम जल्द ही दुनिया के सबसे बड़े, कह सकते हैं, गोल्ड सेंट्रल बैंक जैसे बनते जा रहे हैं.”
आंकड़ों पर नजर डालें तो टेथर की आक्रामक खरीदारी और भी चौंकाती है. ब्लूमबर्ग के अनुमान के मुताबिक, कंपनी ने पिछले वर्ष लगभग 70 टन से अधिक सोना खरीदा. यह मात्रा ज्यादातर केंद्रीय बैंकों से भी ज्यादा है. केवल पोलैंड ऐसा देश रहा जिसने इससे अधिक, करीब 102 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा. बड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) को छोड़ दिया जाए तो इतनी खरीदारी किसी और निजी संस्था ने नहीं की.
कितना सोना रखा है बंकर में?
अर्दोइनो के अनुसार, टेथर के पास फिलहाल करीब 140 टन सोना मौजूद है, जिसमें कंपनी का रिज़र्व और उसके गोल्ड टोकन को सपोर्ट देने वाला भंडार शामिल है. इसकी अनुमानित कीमत करीब 24 अरब डॉलर है. यह बैंकों, केंद्रीय बैंकों और बड़े ETFs को छोड़कर सबसे बड़ा ज्ञात भंडार माना जाता है. कंपनी हर सप्ताह लगभग एक से दो टन सोना खरीद रही है और आने वाले महीनों तक यह सिलसिला जारी रखने की योजना है.
टेथर की कमाई का मुख्य स्रोत उसका डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन यूएसडीटी (Stablecoin USDT) है, जिसकी बाजार में लगभग 186 अरब डॉलर की सप्लाई है. लोग असली डॉलर देकर USDT खरीदते हैं और कंपनी उस पैसे को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड और सोने जैसी संपत्तियों में निवेश करती है. इससे उसे ब्याज और ट्रेडिंग से अरबों डॉलर का लाभ होता है.
ज्यादा खरीदकर कम बताते हैं कई देश!
वैश्विक सोना बाजार की प्रकृति काफी गोपनीय है, इसलिए यह पता लगाना कठिन होता है कि असल खरीदार कौन है. उदाहरण के तौर पर चीन ने आधिकारिक तौर पर केवल 27 टन सोने की खरीद बताई थी, लेकिन कई व्यापारियों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक रहा होगा.
टेथर की घोषित खरीदारी इतनी बड़ी है कि कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि इसने वैश्विक कीमतों को ऊपर धकेलने में अहम भूमिका निभाई है. जेफरीज फाइनेंशियल ग्रुप के विश्लेषकों के अनुसार, पिछले साल सोने में आई लगभग 65 प्रतिशत की तेजी में टेथर की खरीद का बड़ा योगदान हो सकता है. उन्होंने कंपनी को ‘महत्वपूर्ण नया खरीदार’ बताते हुए कहा कि इससे लंबे समय तक सोने की मांग मजबूत बनी रह सकती है.




