हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। फाल्गुन मास की इस चतुर्थी को ‘द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति आज के दिन पूरी श्रद्धा से गणपति की उपासना करता है, उसके जीवन से मानसिक और आर्थिक तनाव पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।
पूजा का शुभ संयोग और महत्व धार्मिक पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज यानी 5 फरवरी 2026 को चतुर्थी तिथि का संयोग बना है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ ही है ‘संकटों को हरने वाली चतुर्थी’। शास्त्रों के मुताबिक, आज के दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। रात के समय चंद्रोदय के बाद पूजा करने से बप्पा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
संकष्टी चतुर्थी पर किए जाने वाले विशेष गणेश मंत्र और उनके अर्थ
1. श्री गणेश वंदना (सफलता के लिए)
यह मंत्र किसी भी कार्य की निर्विघ्न समाप्ति के लिए सबसे पहले पढ़ा जाता है।
मंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ अर्थ: हे टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्यों को हमेशा बाधा रहित पूरा करने की कृपा करें।
2. बाधा मुक्ति और मूल मंत्र (करियर के लिए)
ये मंत्र जीवन की छोटी-बड़ी अड़चनों को दूर कर तरक्की के रास्ते खोलते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः: (यह गणेश जी का मूल मंत्र है, जिसका अर्थ है- मैं विघ्नहर्ता भगवान गणेश को नमन करता हूँ।)
ॐ विघ्नेश्वराय नमः: (विघ्नों के अधिपति भगवान गणेश को मेरा प्रणाम।)
ॐ वक्रतुण्डाय हुं: (यह एक शक्तिशाली बीज मंत्र है जो नकारात्मकता को नष्ट करता है।)
मंत्र: ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।’
मंत्र: ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये। वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।
अर्थ: इन मंत्रों के माध्यम से लक्ष्मी जी और गणेश जी से प्रार्थना की जाती है कि वे हमें सौभाग्य प्रदान करें और संसार में हमें यश और सफलता दिलाएं।
5. बुद्धि और ज्ञान का मंत्र (विद्यार्थियों के लिए)मंत्र: ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्। अर्थ: हम उन एकदन्त (गणेश) को जानते हैं, हम उन वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वे दन्ती (हाथी के दांत वाले बप्पा) हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।




