अगर आपको भी अपने जीवनसाथी या पार्टनर से यह कहने में स्ट्रगल करना पड़ता है कि आपको उनसे क्या चाहिए, तो इसके पीछे एक बहुत गहरा कारण हो सकता है। साइकोलॉजिस्ट डॉ. ललिता सुगलानी का कहना है कि जिंदगी के किसी मोड़ पर या बचपन में आपने शायद अनजाने में यह सीख लिया था कि आपकी इच्छाएं और जरूरतें खुलकर बयां करना ‘सही’ नहीं है। आइए, डिटेल में समझते हैं इस बारे में।
दूसरों को खुश करने की आदत
साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि अपनी जरूरतों को सही न मानकर, लोग एक अलग ही रास्ता अपना लेते हैं। ऐसे में, वे दूसरों की बातें सुनने, उनका हर कदम पर सपोर्ट करने और उनके बिना कहे ही उनकी जरूरतों को समझना सीख लेते हैं। इन सबके पीछे मन में एक खामोश उम्मीद छिपी होती है कि शायद कोई आपके लिए भी ऐसा ही करेगा।
इसे एक ‘अनकहा समझौता’ कहा जा सकता है, जो आपके नर्वस सिस्टम में बना एक ऐसा साइलेंट रूल है, जहां आप यह विश्वास कर बैठते हैं कि “अगर मैं दूसरों के लिए बहुत कुछ करूंगा, तो शायद बदले में मुझे भी प्यार और परवाह मिलेगी।”
इसी पुरानी सीख की वजह से लोग खुद को दूसरों के हिसाब से ढालना शुरू कर देते हैं। दूसरों से जुड़ाव महसूस करने और उनके करीब रहने के लिए, वे खुद को और अपनी जरूरतों को पूरी तरह से नजरअंदाज करना सीख लेते हैं।
यही ‘इनर चाइल्ड वर्क’ की असली ताकत है। जब आप एक समझदार एडल्ट के रूप में अपने अतीत में वापस जाते हैं और अपने अंदर छिपे उस डरे हुए इनर चाइल्ड से दोबारा जुड़कर उसे सुरक्षित महसूस करा सकते हैं, इससे आपके जीवन और रिश्तों में एक बहुत बड़ा पॉजिटिव चेंज आ सकता है।




