नई दिल्ली : अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर 24 फरवरी (मंगलवार) से 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध करार दिए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस संबंध में नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है।
हालांकि, ट्रंप द्वारा 15 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद व्यापारिक समुदाय में अब भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि इस संबंध में अब तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। ट्रंप ने 21 फरवरी को सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का आदेश दिया था। इसमें भारत भी शामिल है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनामिक पावर्स एक्ट (आइईईपीए) के तहत लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध ठहराया था और कहा था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।
पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते को कानूनी दस्तावेज का रूप देने के लिए 23-26 फरवरी के बीच वाशिंगटन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक प्रस्तावित थी, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।डेमोक्रेट सांसदों ने रिफंड पर बढ़ाया दबाव अमेरिका के विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दुनियाभर के देशों से वसूले गए लगभग 175 अरब डालर के टैरिफ की वापसी शुरू करने की मांग की है।
ओरेगन से सीनेटर रान वायडेन, मैसाचुसेट्स के सांसद एड मार्की और न्यू हैंपशायर के जीन शाहीन ने सोमवार को बताया कि वे एक विधेयक पेश कर रहे हैं, जिसके तहत अमेरिकी कस्टम एंड बार्डर प्रोटेक्शन विभाग को 180 दिनों की अवधि में धन वापसी जारी करने और वापस की गई राशि पर ब्याज का भुगतान करना होगा।
टैरिफ वसूली आज से रोकेगा अमेरिका, रिफंड पर सस्पेंस
अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा एजेंसी (सीबीपी) ने घोषणा की है कि वह मंगलवार तड़के 12:01 बजे (ईएसटी) से उन टैरिफ की वसूली रोक देगी, जिन्हें हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया है। सीबीपी ने शिपर्स को अपने कार्गो सिस्टम्स मैसेजिंग सर्विस (सीएसएमएस) के जरिए भेजे संदेश में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनामिक पावर्स एक्ट (आइईईपीए) से जुड़े पूर्व आदेशों के तहत लागू सभी टैरिफ कोड मंगलवार से निष्कि्रय कर दिए जाएंगे।
हालांकि, सीबीपी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कोर्ट के फैसले के बाद भी पिछले कुछ दिनों तक बंदरगाहों पर टैरिफ वसूली क्यों जारी रही। साथ ही, एजेंसी ने संभावित रिफंड के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी है।




