क्रूड ऑयल की कीमतें आज 12 मार्च को तेजी से बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. ब्रेंट क्रूड 7.16% बढ़कर 98.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. जबकि ये 91.98 डॉलर के लेवल पर बंद हुआ था. अमेरिकी WTI क्रूड भी 7.3% बढ़कर 93.70 डॉलर पर आ गया, जबकि पहले यह 87.25 डॉलर था. इस तेज उछाल के पीछे होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर हुए हमलों को माना जा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी क्षेत्र का एक बहुत अहम जलमार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग एक पांचवां हिस्सा तेल रोजाना गुजरता है. यहां से सऊदी अरब, इराक, कुवैत, UAE जैसे देशों का तेल एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में जाता है.
हाल के दिनों में यहां कई हमले हुए हैं. यूके मैरीटाइम अथॉरिटी के अनुसार, तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला हुआ. रॉयटर्स के अनुसार, इराकी पानी में दो फ्यूल टैंकरों पर ईरान से जुड़ी एक विस्फोटक वाली नाव से हमला किया गया. इसके अलावा, ईरान ने स्ट्रेट में माइंस (खदानें) बिछाई हैं, जिससे जहाजों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है. इन घटनाओं से तेल की सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं.
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के फैसले के बावजूद क्रूड में उबाल
इस बीच, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने 11 मार्च 2026 को बड़ा फैसला लिया. उसके 32 सदस्य देशों (जिनमें अमेरिका, जापान, जर्मनी आदि शामिल हैं) ने रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल तेल अपनी स्ट्रैटेजिक रिजर्व( Emergency Reserve) से बाजार में रिलीज करने का ऐलान किया. यह इतिहास का सबसे बड़ा रिजर्व रिलीज है. इसका मकसद सप्लाई की कमी को पूरा करना और कीमतों को नीचे लाना है. लेकिन बाजार में डर इतना ज्यादा है कि इस रिलीज के बावजूद कीमतें बढ़ रही हैं.
पिछले हफ्ते ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका-ईरान संघर्ष जल्द खत्म हो जाएगा, जिससे कीमतें थोड़ी कम हुई थीं. लेकिन बुधवार को नए हमलों से फिर उछाल आ गया. ईरान की तरफ से धमकी आई है कि अगर तनाव बढ़ा तो तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है और स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी नहीं गुजरेगा. यह स्थिति भारत जैसे देशों के लिए चिंता की बात है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है. अगर कीमतें ज्यादा दिन ऊंची रहीं तो पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और अन्य चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी. बाजार में अभी अनिश्चितता है. अगर स्ट्रेट में तनाव कम हुआ तो कीमतें गिर सकती हैं, लेकिन अगर संघर्ष लंबा चला तो 100 डॉलर से ऊपर जा सकती हैं.
400 मिलियन बैरल तेल रिलीज होने से असल में कितना फायदा?
CNBC TV-18 की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का मानना है कि IEA द्वारा 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला मौजूदा समस्या का पूरा समाधान नहीं है. ज्यादातर रिफाइंड प्रोडक्ट, जैसे जेट फ्यूल, अब भी होर्मुज से होकर गुजरते हैं और वहां आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो रही है. ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हुई है, क्योंकि होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है .साथ ही लंबे समय तक युद्ध चलने की आशंका भी IEA के फैसले से ज्यादा चिंता बढ़ा रही है. दोनों पक्ष फिलहाल बातचीत शुरू करने के लिए एकमत होते नजर नहीं आ रहे हैं.




