नई दिल्ली : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को सरकारी कंपनियों और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों की सैलरी में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दे दी। यह फैसला अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष से जुड़े ईंधन संकट और तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण आर्थिक दबाव को कम करने के लिए लिया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, बैठक में तय किया गया कि सरकारी कर्मचारियों की तरह अब राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों और सरकारी संरक्षण वाली संस्थाओं के कर्मचारियों की सैलरी में भी 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती होगी।
सरकारी वाहनों पर सख्तीसरकार ने कहा कि इन ऑस्टरिटी उपायों से जो पैसा बचेगा, उसका इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ जनता की राहत के लिए किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी।
अगले दो महीनों में 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाएगा। इसकी निगरानी थर्ड पार्टी ऑडिट करेगी।
बोर्ड मेंबर्स को मिलने वाली फीस बंदकॉरपोरेशन और संस्थाओं के बोर्ड में प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को अब कोई भागीदारी शुल्क (सिटिंग फीस) नहीं मिलेगा। यह राशि भी बचत में जुड़ेगी। सरकार ने नए वाहन खरीदने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
सरकारी खरीद पर भी पूरी पाबंदी है। अगले दो महीनों की कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों की सैलरी को भी जन कल्याण के लिए बचत के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
विदेश यात्राओं पर पूरी रोकसरकारी अधिकारी, मंत्री, राज्य मंत्री और विशेष सहायकों की सभी विदेश यात्राओं पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी। मध्य पूर्व के संघर्ष से पाकिस्तान पर आर्थिक असर पड़ना शुरू हो गया है। पिछले शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।
इसके बाद सरकार ने ईंधन की खपत कम करने के लिए ये कड़े कदम उठाए हैं। पहले से ही सरकारी वाहनों के ईंधन में 50% कटौती, 60% वाहनों को सड़क से हटाना और सरकारी दफ्तरों में चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जा चुका है।




