जगदलपुर : साल और सागौन के घने पेड़ों के बीच पसरा सन्नाटाज्.. और उस सन्नाटे को चीरती बंदूक की नली, जो तय करती थी कि किसे जीना है और किसे मरना है।बस्तर के इन जंगलों में सक्रिय माओवादी बटालियन सिर्फ एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि एक ऐसी सुनियोजित ‘फैक्ट्री’ थी, जहां इंसान से उसकी संवेदनाएं छीनकर उसे हिंसक औजार में बदल दिया जाता था।
आत्मसमर्पित माओवादी ‘डॉक्टर’ मड़कम केसा की आपबीती इस भयावह तंत्र की परत-दर-परत सच्चाई सामने लाती है। केसा के अनुसार, संगठन में शामिल होते ही युवाओं की दुनिया बदल दी जाती थी।
पहले उनके हाथ में बंदूक थमाई जाती, फिर यह एहसास मिटा दिया जाता कि उनका कोई अपना है। इस तैयारी का सबसे कठोर हिस्सा नसबंदी था। करीब 300 से अधिक माओवादियों की नसबंदी कर उन्हें परिवार और भविष्य के हर मोह से काट दिया गया।
इनमें कई शादीशुदा भी थे, लेकिन उन्हें पिता बनने का अधिकार नहीं मिला। खुद केसा भी इससे गुजरा। उसने चेतना नाट्य मंडली की सदस्य आयती से विवाह किया, लेकिन यह रिश्ता अधूरा रहा। अब आत्मसमर्पण के बाद दोनों सामान्य जीवन में लौटना चाहते हैं और नसबंदी रिवर्स कराने की इच्छा रखते हैं, ताकि अपने गांव में परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकें।
जंगल में सर्जरी, संवेदनाओं का अंतउसने बताता कि नसबंदी जैसी प्रक्रियाएं जंगलों में सीमित संसाधनों के बीच होती थीं। ‘डॉक्टर’ की भूमिका में उसने खुद कई साथियों की नसबंदी की। यह सिर्फ चिकित्सा नहीं, बल्कि लड़ाकों को उनके स्वाभाविक रिश्तों से काटने की रणनीति थी।
यही कारण रहा कि इस बटालियन की क्रूरता कई बार रोंगटे खड़े कर देने वाली बनी- ताड़मेटला में 76 जवानों के बलिदान के बाद शवों के बीच जश्न और झीरम कांड में महेंद्र कर्मा की हत्या के बाद ¨हसक उत्सव, संवेदनहीनता की चरम अभिव्यक्ति थी।
बटालियन का अनुशासन भय और अविश्वास पर टिका था। हिड़मा का इतना खौफ था कि सदस्य उससे सीधे संवाद से बचते। वह दूरी बनाए रखता, साथ खाना तक नहीं खाता था। सुकमा के पूवर्ती गांव का हिड़मा, जो कभी मवेशी चराता था, माओवादियों के साथ जाकर समय के साथ कुख्यात कमांडर बन गया।
2023 में गढ़ छोड़ना पड़ा और जनवरी 2025 में कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में डेरा डालने के बाद भी दबाव बना रहा, जिससे बटालियन कई हिस्सों में बंट गई। 18 नवंबर को आंध्र प्रदेश के मारेडुमिली के जंगल में हिड़मा के मारे जाने के बाद इसका मनोबल टूट गया और अब इसके अधिकांश सदस्य समर्पण कर चुके हैं।




