नई दिल्ली : रक्षा संबंधी संसद की स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परि²श्य और प्रौद्योगिकी के विकास के मद्देनजर, रक्षा क्षेत्र में किसी भी खरीद और अधिग्रहण प्रक्रिया में आपूर्ति के लिए समयसीमा होनी चाहिए। खरीद में अत्यधिक देरी से प्रौद्योगिकी और उपकरण अप्रचलित और बेकार हो सकते हैं।
संसदीय समिति ने बुधवार को संसद में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों और विश्वसनीय युद्ध प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए वह बजट आवंटन में और वृद्धि की सिफारिश करती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधुनिकीकरण में रक्षा क्षमताओं को उन्नत और मजबूत करने के लिए अत्याधुनिक प्लेटफार्म, प्रौद्योगिकी और हथियार प्रणालियों की खरीद शामिल है।
समिति का मानना है कि यह खतरे की आशंका, परिचालन संबंधी चुनौतियों और तकनीकी परिवर्तनों पर आधारित एक सतत प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को सुरक्षा संबंधी सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रखना है।
सरकारी स्वामित्व वाली एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने संसदीय समिति को बताया कि वर्तमान में उसके पास सशस्त्र बलों को 34 ध्रुव, 180 एलसीए तेजस मार्क-1ए विमान और 156 प्रचंड हमलावर हेलीकाप्टर की आपूर्ति का आर्डर है। एचसीए मार्क 1ए अल्फा के बारे में एचएएल ने बताया कि उसके पास पांच विमान तैयार हैं।
एएनआइ के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को सूचित किया है कि वायु सेना छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास के लिए यूरोप के किसी कंसोर्टियम में शामिल होना चाहती है।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हमें बताया गया है कि दो कंसोर्टियम छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर काम कर रहे हैं। एक कंसोर्टियम में ब्रिटेन, इटली और जापान शामिल हैं, जबकि दूसरे में फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं। दोनों कंसोर्टियम विमानों का विकास कर रहे हैं।
वायु सेना किसी एक कंसोर्टियम के साथ मिलकर काम करने का प्रयास करेगी और उन्नत विमान हासिल करने में पीछे नहीं रहने के उद्देश्य से तुरंत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर विचार करना शुरू कर देगी।




