अक्सर कई माता-पिता को यह लगता है कि कड़े नियम और सख्त अनुशासन ही बच्चों का भविष्य संवारने का एकमात्र तरीका है। शुरुआत में, डर के मारे बच्चे हर बात मानते हैं और गलतियां करने से बचते हैं, जिससे माता-पिता को अपना यह तरीका सही लगने लगता है।
हालांकि, असल में यह कड़क रवैया बच्चों के दिलों में एक ऐसी कड़वाहट भर रहा होता है, जो भविष्य में उनके और माता-पिता के बीच एक गहरी खाई पैदा कर देता है।
पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली के अनुसार, माता-पिता की ज्यादा सख्ती बच्चों पर कई गंभीर और नकारात्मक प्रभाव डालती है। आइए, इस आर्टिकल में समझते हैं कि ज्यादा सख्ती कैसे बच्चों को आपसे दूर कर रही है।
डर के साये में घुटती भावनाएंजब घर का माहौल बहुत ज्यादा सख्त होता है, तो बच्चे अपनी बात खुलकर कहने से कतराने लगते हैं। उनके मन में हर वक्त यह खौफ बैठा रहता है कि उनकी किसी बात पर उन्हें डांट पड़ेगी या कड़ी सजा मिलेगी। इस डर के कारण वे अपनी भावनाओं को अपने अंदर ही दबाने लगते हैं।
- सहमा हुआ बचपन: हर समय गलती करने के डर से बच्चों का आत्मविश्वास पूरी तरह से टूट सकता है और वे बिल्कुल शांत या गुमसुम रहने लगते हैं।
- विद्रोही स्वभाव: वहीं दूसरी ओर, इस दबाव के चलते कुछ बच्चे बड़े होने पर बागी स्वभाव के भी बन सकते हैं।
ये दोनों ही स्थितियां माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी को और ज्यादा बढ़ा देती हैं।
- प्यार और अपनापन
- समझदारी
- खुली बातचीत



