हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने की अमावस्या का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। इसे ‘सत्तू अमावस्या’ भी कहा जाता है। पितृ पक्ष के अलावा यह साल की सबसे बड़ी तिथियों में से एक है, जब हम अपने पूर्वजों को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वैशाख अमावस्या की काली रात में दीपक जलाने का एक विशेष विधान है।
ऐसी मान्यता है कि अगर इस रात घर के 5 विशेष स्थानों पर दीपक जलाया जाए, तो न केवल कुंडली से पितृ दोष शांत होता है, बल्कि घर की दरिद्रता भी दूर होती है। आइए जानते हैं कि वे कौन से स्थान हैं, जहां दीपदान करना बेहद शुभ माना जाता है?
घर के इन 5 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक
घर का मुख्य द्वार
अमावस्या की शाम को घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। यह दीपक घर की नकारात्मकता को दूर करता है। साथ ही शुभता का आगमन होता है।
दक्षिण दिशा
दक्षिण दिशा पितरों की मानी जाती है। ऐसे में अमावस्या की रात घर के दक्षिण कोने में एक दीपक जलाकर उसका मुख दक्षिण की ओर रखें। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार को वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
रसोई घर
रसोई में जहां पीने का पानी रखा जाता है, वहां दीपक जलाना बहुत शुभ होता है। माना जाता है कि पितृ जल के स्थान पर वास करते हैं। यहां दीपक जलाने से रोग-दोष से मुक्ति मिलती है।
तुलसी का पौधा
तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। अमावस्या पर तुलसी माता की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पीपल का पेड़ या ईशान कोण
अगर हो पाए, तो घर के पास किसी पीपल के पेड़ के नीचे सात मुखी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। अगर बाहर नहीं जा सकते, तो घर के मंदिर या ईशान कोण में दीपक जलाएं। ऐसा करने से सोई हुई किस्मत जाग उठती है।



