Home लाइफस्टाइल युवा हो रहे लिवर प्रॉब्लम का शिकार, वजह बनी बदलती लाइफस्टाइल

युवा हो रहे लिवर प्रॉब्लम का शिकार, वजह बनी बदलती लाइफस्टाइल

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22 साल के युवा में कोई स्पष्ट स्वास्थ्य समस्या नहीं दिखती, लेकिन अब असामान्य लीवर टेस्ट रिपोर्ट लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। विश्व लीवर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि युवा वयस्कों में लीवर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है।

यह मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी मेटाबॉलिक गड़बड़ियों के कारण हो रहा है और अब यह एक तेजी से बढ़ता सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।

युवाओं में MASLD की बढ़ती समस्या

डॉक्टरों के अनुसार, मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोटिक लीवर डिजीज (MASLD) पहले मुख्य रूप से मध्यम आयु वर्ग से जोड़ा जाता था। अब 20 साल की शुरुआती उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। गतिहीन जीवनशैली, खराब आहार और बढ़ते मेटाबॉलिक जोखिमों ने इसे बढ़ावा दिया है।

इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बाइलरी साइंसेज (ILBS) के निदेशक डॉ. एस.के. सरिन ने कहा कि युवा भारतीयों में फैटी लीवर डिजीज का बोझ साफ तौर पर बढ़ रहा है। यह सबूतों पर आधारित एक स्पष्ट और चिंताजनक प्रवृत्ति है।

दिल्ली सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े

2024 में दिल्ली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में किए गए सर्वे का हवाला देते हुए डॉ. सरिन ने बताया कि स्क्रीनिंग कराए गए लोगों में से 56% को फैटी लीवर डिजीज पाई गई। हर दो में से एक व्यक्ति को फैटी लीवर था, जिसमें 11% वे भी शामिल थे जो दुबले-पतले थे और मोटे नहीं थे। इससे आम धारणा कि यह बीमारी केवल मोटापे वाले लोगों को ही प्रभावित करती है, चुनौती मिली है।

उन्होंने आगे कहा कि मोटापे की दर उम्र के साथ तेजी से बढ़ती है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में लगभग 3% से बढ़कर 12 साल की उम्र तक करीब 15% हो जाती है। इससे पता चलता है कि मेटाबॉलिक जोखिम बहुत कम उम्र से शुरू हो जाता है।

क्या है MASLD?

मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, साकेत के डॉ. संजीव सैगल ने बताया कि MASLD मोटापा, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों वाले लोगों में लीवर में फैट जमा होने से होता है। अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो यह सरल फैट जमा होने से शुरू होकर सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लीवर कैंसर तक पहुंच सकता है।

पीएसआरआई अस्पताल के डॉ. भूषण भोले ने इसे परफेक्ट स्टॉर्म बताया। आनुवंशिक प्रवृत्ति, अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता और कम उम्र में मेटाबॉलिक गड़बड़ियां इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं। 18-35 साल के कम से कम एक में चार युवा भारतीयों में MASLD या बढ़े हुए लीवर एंजाइम्स के लक्षण दिख रहे हैं। भारतीयों में सामान्य वजन पर भी visceral fat जमा होने की प्रवृत्ति अधिक होती है, जिसे lean MASLD कहा जाता है।

सरवोदय अस्पताल के एयर कमोडोर (डॉ.) भास्कर नंदी ने कहा कि यह बीमारी अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। सामान्य वजन वाले व्यक्ति भी छिपे visceral fat और इंसुलिन रेसिस्टेंस के कारण लीवर के बड़े जोखिम में रह सकते हैं। उन्होंने MASLD को देर रात खाने, लंबे समय तक बैठे रहने और नींद की पुरानी गड़बड़ी की बीमारी बताया।

क्या कहते है आंकड़े?

दस लाख स्वास्थ्य-शिक्षित छात्रों के माध्यम से एक सशक्त भारत (SMILES) कार्यक्रम के डेटा से भी चिंता बढ़ी है। 18-25 साल के 43,000 से अधिक युवाओं में फैटी लीवर, उच्च रक्तचाप और sedentary व्यवहार आम पाया गया। लगभग 40% युवाओं ने बताया कि वे रोज 40 मिनट भी नहीं चलते।

2025 के एक मल्टीसेंट्रिक भारतीय अध्ययन में 13,000 से अधिक वयस्कों में फैटी लीवर की दर 68% तक पाई गई, जिसमें एक तिहाई में लीवर फाइब्रोसिस के संकेत थे। उत्तर भारत में बोझ सबसे अधिक था और युवा वयस्क भी समान रूप से प्रभावित थे। डॉ. भोले ने वायु प्रदूषण, खासकर PM2.5 के संपर्क को लीवर में सूजन और फैट जमा होने से जोड़ा।