हिंदू धर्म में वैशाख महीने की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस पावन तिथि को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के नाम से जाना जाता है। इस साल यह पर्व 1 मई 2026 को मनाया जाएगा।
यह दिन न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बल्कि हिंदू धर्म को मानने वालों के लिए भी बहुत खास है। क्योंकि, शास्त्रों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने 9वें अवतार के रूप में बुद्ध का जन्म लिया था।
तीन प्रमुख घटनाओं का संगम
बुद्ध पूर्णिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं इसी दिन हुई थीं, उनका जन्म, उन्हें ज्ञान (निर्वाण) की प्राप्ति और उनका महापरिनिर्वाण (परम मोक्ष)। यही कारण है कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से साल की सबसे शक्तिशाली पूर्णिमाओं में से एक माना जाता है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे महीने तीर्थ स्नान नहीं कर पाया, वह अगर इन तीन दिनों में सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में स्नान कर ले, तो उसे पूरे वैशाख मास का पुण्य फल मिल जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करें?स्नान और दान: सुबह जल्दी उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर घर पर नहा रहे हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल जरूर मिलाएं। स्नान के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन व कपड़े दान करें।
पूजा और पाठ: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन श्रीविष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।
चंद्रमा को अर्घ्य: पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल (अर्घ्य) देने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
दीपदान: इस दिन बोधि वृक्ष (बिहार के बोधगया में स्थित एक पवित्र पीपल का पेड़) या पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है।



