रायपुर : सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर आंदोलनरत तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल फिलहाल समाप्त होती नजर नहीं आ रही है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा और राजस्व विभाग की सचिव शमी आबदी के साथ हुई चर्चा के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। इसके बाद कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रहेगा।
आज राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के सरकारी निवास पर कनिष्ठ प्रशासनिक संघ और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। बैठक में राजस्व सचिव शमी आबदी भी मौजूद रहीं। सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त कराने और समाधान निकालने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
गिरफ्तारी तक जारी रहेगा आंदोलन
बैठक के बाद कनिष्ठ प्रशासनिक संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “मंत्री और राजस्व सचिव से बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। जब तक गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
सीतापुर घटना के बाद शुरू हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद पूरे प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आक्रोशित हैं।
राजस्व अधिकारियों ने शुरुआत में मुख्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने सामूहिक अवकाश, कलमबंद हड़ताल और बाद में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया।
राजस्व मंत्री ने जताई थी समाधान की उम्मीद
बैठक से पहले राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा था कि सचिव स्तर पर लगातार बातचीत चल रही है और जल्द ही समाधान निकल जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया था कि तहसील अधिकारी काम पर लौट आएंगे और स्थिति सामान्य हो जाएगी।
हालांकि ताजा घटनाक्रम के बाद स्पष्ट हो गया है कि आंदोलनरत अधिकारी अभी सरकार के आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं।
राजस्व कार्यों पर पड़ रहा असर
तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर प्रदेशभर के राजस्व कार्यों पर पड़ने लगा है। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र सहित कई प्रशासनिक और राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अब सभी की नजरें सरकार और आंदोलनरत अधिकारियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में राजस्व व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।



