रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस मिशन 2028 में जुट गई है। कांग्रेस पार्टी में विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। कांग्रेस पार्टी एक बार फिर जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बचाने के मुद्दों को लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है। इस बार साथ में आदिवासी वोटबैंक साधने के लिए “धर्मांतरण, डी-लिस्टिंग और जनगणना में आदिवासी पहचान” जैसे भावनात्मक मुद्दे भी उठाए जा रहे है। इन तमाम मुद्दों को लेकर आज राजीव भवन में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में करीबन 4 घंटे तक कांग्रेस की मैराथन बैठक चली।
इस बैठक में मुख्य रूप से नेता प्रतिपक्ष डॉ. चारण दास महंत, पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू की मौजूद रहे। आदिवासी कांग्रेस की बैठक में 12 बिंदुओं के सामाजिक और राजनैतिक प्रस्ताव भी सर्व सहमति से पारित किया गया है। कांग्रेस आदिवासियों के हित के मुद्दों को उठाने के लिए “प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी” बनाने जा रही है। यह कमेटी गांव-गांव जाकर आदिवासियों से चर्चा करेगी और जन आंदोलन की रणनीति तय करेगी।
कांग्रेस के 12 सूत्री सामाजिक और राजनैतिक प्रस्ताव
- हसदेव समेत नई खदानों में कोयला-आयरन खनन रद्द हो: 1,742 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्जन की अनुमति तुरंत वापस ली जाए।
- 32% आरक्षण लागू हो: राजभवन में लंबित आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी हो।
- वनाधिकार पट्टा बांटे जाएं: Forest Rights Act का कड़ाई से पालन हो।
- विस्थापित आदिवासी वापस लाए जाएं: नक्सल हिंसा और फर्जी एनकाउंटर पीड़ितों को मुआवजा मिले।
- जेल में बंद निर्दोष आदिवासी रिहा हों: 25 हजार से अधिक स्थायी-अस्थायी वारंट रद्द हों।
- ग्राम सभा सर्वोच्च हो: पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों की रक्षा हो।
- UCC से आदिवासियों को छूट मिले: विवाह, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था UCC के दायरे से बाहर रहे।
- बस्तर-सरगुजा में बंद स्कूल खोलें: स्थानीय भर्ती में आदिवासियों को आरक्षण मिले।
- पेसा कानून का शत-प्रतिशत पालन: बिना ग्राम सभा की सहमति के जमीन अधिग्रहण बंद हो।
- पांचवीं अनुसूची लागू हो: जनसांख्यिकी और संस्कृति को बाहरी हस्तक्षेप से बचाया जाए।
- “वनवासी” शब्द का विरोध: RSS-BJP की “आदिवासी पहचान मिटाने की साजिश” की निंदा।
- जनगणना में अलग कॉलम: 2026-27 की जनगणना में आदिवासियों की स्पष्ट पहचान के लिए अलग से कॉलम बने।
आदिवासी कांग्रेस की बैठक को लेकर PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने जिस तरह से प्रदेश में आदिवासियों की जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को छिनने का काम कर रही है। इसे किस तरह से बचाया जाए बैठक में चर्चा की गई है। इस सरकार से आदिवासियों को किस तरह से बचाना है। इस पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है। इस सरकार के ख़िलाफ कांग्रेस पार्टी बहुत जल्द निर्णायक लड़ाई लड़ने मैदान में उतरने वाली है। हसदेव जंगल को उजाड़ने के लिए केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी है, जिसके चलते अब हसदेव के 6 लाख पी काटने जा रहे है।
भाजपा और उनके 33 संगठन सिर्फ आदिवासियों को लड़ाने के लिए उन्हें तोड़ने के लिए और उनके हक को छीनने का काम कर रही है। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी भाजपा और उन 33 संघठनों के ख़िलाफ लड़कर आदिवासियो के हित को दिलाने का काम करेगी। भविष्य में हम समाज प्रमुखों से भी चर्चा कर आदिवासियों के हित के लिए कार्य करेंगे।
नेताम और साय का भी समर्थन लेने की तैयारी
इस आंदोलन के लिए कांग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा सियासी दांव है अरविंद नेताम और नंदकुमार साय को साथ लाने और उनका समर्थन लेने की कोशिश है। इस वक़्त दोनों आदिवासी नेता BJP से नाराज चल रहे हैं। नेताम पहले ही सरगुजा में अलग पार्टी बना चुके हैं, जबकि नंदकुमार साय आदिवासी हित के लिए समय-समय पर बीजेपी को कठघरे में खड़ा कर देते है। कांग्रेस इन्हें जोड़कर बस्तर-सरगुजा साधने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक दीपक बैज खुद दोनों नेताओं से संपर्क में हैं।
BJP-RSS पर सीधा हमला
इस प्रस्ताव में सीधे RSS-BJP पर निशाना साधा गया है। कहा गया- “RSS आदिवासियों को ‘वनवासी’ का संबोधन देकर मूल पहचान नष्ट करने की साजिश रच रही है। हम आदिवासी हैं और रहेंगे।” साथ ही धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग को भी मुद्दा बनाया गया है।
आदिवासियों को न्याय नहीं
इस बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार और आदिवासी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा की प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बाद भी आदिवासियों के हित की नहीं बल्कि उनके हक को छीनने का कार्य सरकार कर रही है। सरकार ने शपथ ग्रहण के दिन से ही राज्य के आदिवासियों को ठगने, लूटने और उनके हक को छीनने का काम किया है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद
आदिवासी कांग्रेस को बैठक में उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल, पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, अनिला भेड़िया, विधायक विद्यावती सिदार, लालजी सिंह राठिया, फूल सिंह राठिया, अंबिका मरकाम, इंद्र शाह मंडावी, सावित्री मंडावी समेत 40 से ज्यादा आदिवासी नेता मौजूद थे।



