बुधवार को श्री शीतलाष्टमी का व्रत किया जायेगा। वैसे तो प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री शीतलाष्टमी व्रत किया जाता है, लेकिन पुराणों में चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ज्यादा ही फलदायी बताया गया है। इन महीनों की अष्टमी तिथि को शीतला माता की पूजा अर्चना करने से जातक की समस्त मनोकामनाएं अतिशीघ्र पूर्ण होती है। इस दिन माताएं अपने बच्चों और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिये शीतला माता के निमित्त व्रत रखती हैं। शीतलाष्टमी के दिन रास्ते के पत्थर को देवी मां का स्वरूप मानकर, उसकी पूजा करने की भी परंपरा है, इसीलिए शीतला माता का एक नाम पथवारी माता भी है।
शीतलाष्टमी के दिन देवी मां की विधि-पूर्वक पूजा करके उन्हें बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है। साथ ही खुद भी प्रसाद के रूप में बांसी भोजन का सेवन करना चाहिए और देवी मां का आशीर्वाद लेना चाहिए। इस दिन ऐसा करने से व्यक्ति हष्ट-पुष्ट बना रहता है, उसे किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा शीतलाष्टमी के दिन इन विशेष उपायों को करने से समस्त परेशानियों का भी समाधान निकल जाता है।
– अगर आप अपनी नौकरी को लेकर कुछ परेशान हैं तो उस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए शीतलाष्टमी के दिन आपको स्नान आदि के बाद शीतला चालीसा का पाठ करना चाहिए और पाठ करने के बाद देवी मां को पुष्प अर्पित करने चाहिए।
– अगर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर करना चाहते हैं और लंबी आयु का वरदान पाना चाहते हैं, तो शीतलाष्टमी के दिन आपको माता शीतला के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र है- मृणाल तन्तु सदृशीं नाभि हृन्मध्य संस्थिताम्। यस्त्वां संचिन्त येद्देवि तस्य मृत्युर्न जायते।।
– अगर आप अपने परिवार की खुशहाली को बनाये रखना चाहते हैं तो इसके लिए शीतलाष्टमी के दिन आपको शीतलाष्टक स्तोत्र में दिये देवी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र है-शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नम:।।
– अगर आप अपनी दिन-दुगनी, रात-चौगनी तरक्की देखना चाहते हैं तो शीतलाष्टमी के दिन आपको शीतला माता के आगे घी का दीपक जलाना चाहिए और उनकी आरती का एक बार पाठ करना चाहिए।
– अगर आप अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो शीतलाष्टमी के दिन आपको स्नान आदि के बाद शीतला मां का ध्यान करते हुए घर पर ही एक आसन बिछाकर बैठना चाहिए और मंत्रमहोद्धि में दिये देवी मां के इस नौ अक्षरों के मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। मंत्र है-‘ऊँ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।’
– अगर आप अपने बिजनेस को अनजाने खतरों से बचाये रखना चाहते हैं तो इसके लिए शीतलाष्टमी के दिन आपको स्नान आदि के बाद नीम के पेड़ के पास जाना चाहिए और उस पेड़ में देवी मां के स्वरूप का ध्यान करते हुए पहले आपको प्रणाम करना चाहिए। उसके बाद रोली-चावल आदि से पेड़ की पूजा करनी चाहिए।
– आपके जीवनसाथी को किसी प्रकार की परेशानी बनी हुई है तो उस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए शीतलाष्टमी के दिन आपको अपने घर के बाहर पश्चिम दिशा में नीम का पेड़ लगाना चाहिए और उसकी नियमित रूप से देखभाल करनी चाहिए।
– अगर आप अपने हर काम में लाभ पाना चाहते हैं और कामयाबी हासिल करना चाहते हैं तो शीतलाष्टमी के दिन आपको स्नान-आदि के बाद दूध-चावल की खीर बनानी चाहिए और उससे देवी मां को भोग लगाना चाहिए। देवी मां को भोग लगाने के बाद बाकी खीर को प्रसाद के रूप में बच्चों में बांट दें और थोड़ा-सा प्रसाद स्वयं भी खा लें।
– अगर आप देवी भगवती की कृपा अपने ऊपर बनाये रखना चाहते हैं और उनकी कृपा से जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो शीतलाष्टमी के दिन आपको भगवती शीतला की वन्दना करनी चाहिए और उनके इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र है- वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।। मार्जनी कलशोपेतां सूर्प अलंकृत मस्तकाम्।।
– अगर आपके जीवन में मिठास की जगह समस्याओं ने ले ली है तो उस समस्या को दूर करने के लिए और जीवन में मिठास घोलने के लिए शीतलाष्टमी के दिन के दिन आपको नीम की 21 पत्तियां लेनी चाहिए और उन्हें एक धागे में पिरोकर माला बनानी चाहिए। अब उस माला को देवी मां को अर्पित करना चाहिए।
– अगर अगर आप अपने अनजाने में हुये किसी गलती से उलझन में रहते हैं, तो इस सबसे बचने के लिए शीतलाष्टमी के दिन आपको शीतलाष्टक स्तोत्र में दिये माता शीतला के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र है- न मन्त्रो नौषधं तस्य पापरोगस्य विद्यते। त्वामेकां शीतले धात्रीं नान्यां पश्यामि देवताम्।।
– अगर आपको किसी भी प्रकार का भय या स्वास्थ्य समस्या आदि बना रहता है तो इस सबसे छुटकारा पाने के लिए शीतलाष्टमी के दिन आपको शीतलाष्टक स्तोत्र में दिये माता शीतला के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र है- वन्देSहं शीतलां देवीं सर्वरोग भय अपहाम्। यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत्।।



