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UPA सरकार में कितने पेपर लीक हुए; जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा- ‘गिनाने लगूं तो चर्चा ही नहीं कर पाऊंगा’

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नई दिल्ली: पेपर लीक को लेकर बीते दिनों हुए हंगामे के बाद संसद में सोमवार को एंटी पेपर लीक बिल पेश किया गया। इस बिल को लेकर मंगलवार को चर्चा की जा रही है। चर्चा की शुरुआत लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की। जितेंद्र सिंह ने ही लोकसभा में सोमवार को बिल भी पेश किया था। इस चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 में संशोधन के लिए लाया गया बिल है। उन्होंने यूपीए की सरकार के दौरान हुए कई पेपर लीक का भी जिक्र किया। जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर वह पूरी लिस्ट बनाएंगे तो चर्चा नहीं कर पाएंगे। जितेंद्र सिंह ने कहा कि एनटीए का गठन भी इसी सरकार में 2017 में की गई थी, जिसके लिए पीएम मोदी और सरकार की तारीफ की जानी चाहिए। इससे पहले कई बार इसके लिए सिफारिश की गई थी, लेकिन इसे टाला जाता रहा।

‘बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा’
पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह बिल, जिसे कल पेश किया गया था, असल में पहले वाले बिल पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 में एक संशोधन है, जिसे भी इसी सरकार ने पेश किया था। इसे सरकार ने न सिर्फ पेश किया था बल्कि यह शायद आजाद भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला बिल था। पहले वाला बिल और आज का संशोधन, एक तरह से देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए इस सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को भी दोहराता है कि ‘भारत माता’ के बच्चों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। इसलिए, इस बिल को एक तरह से भारतीय संसद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला कानून कहा जा सकता है।”

जितेंद्र सिंह ने गिनाए UPA सरकार के पेपर लीक
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने UPA के समय हुए पेपर लीक की लिस्ट भी बताई। जितेंद्र सिंह ने कहा, “2009- रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड; 2011- ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन; 2012- AIIMS नई दिल्ली एंट्रेंस पेपर लीक; 2013- महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन। 2010- B.Ed. एंट्रेंस एग्जामिनेशन, उत्तर प्रदेश; 2012- तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन। 2009- वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम। अगर मैं इनकी लिस्ट बनाता रहा, तो बिल पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा। इसलिए, इस सरकार को एक खास कानून की जरूरत महसूस हुई।”

‘NTA के लिए पीएम मोदी की तारीफ करनी चाहिए’
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, “भारत सरकार के तहत चार बड़ी रिक्रूटमेंट एजेंसियां ​​हैं- UPSC, स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल; और इसी तरह हायर एजुकेशन में एडमिशन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है। NTA भी इसी सरकार ने 2017 में बनाई थी। 1992 में पहली बार कांग्रेस पार्टी की अगुवाई वाली भारत सरकार से एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई थी। फिर, 2010 में, UPA के कार्यकाल के दौरान, एक कमेटी ने भी यही सुझाव दिया। मुझे नहीं पता कि इस पर ठीक से विचार क्यों नहीं किया गया, चाहे जो भी कारण या निजी हित रहे हों। तो, मुझे लगता है कि आपको प्रधानमंत्री मोदी और इस सरकार की तारीफ़ करनी चाहिए। इसने एक ऐसा काम पूरा किया है एक अधूरा काम जिसे आपको खुद पूरा करना चाहिए था।”

पुराने कानून में क्या-क्या संशोधन किया गया?
जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, “यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके। धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सज़ा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सज़ा की यही अवधि बढ़ाकर कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है। 2024 के कानून में, सर्विस प्रोवाइडर के लिए सज़ा 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना थी। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जा रहा है। 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है। अंत में, संगठित अपराध करने वालों, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, के मामले में पहले सज़ा 5-10 साल थी। इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका ज़िक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने इसके लिए एक समय सीमा भी तय की है। जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी की जानी है।”

पुराने कानून में क्या-क्या संशोधन किया गया?
जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, “यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, ताकि इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़े और बहाल हो सके। धारा 10 की उप-धारा 1 में प्रावधान था कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम 3-5 साल की सज़ा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। आज लाए जा रहे संशोधन के तहत, सज़ा की यही अवधि बढ़ाकर कम से कम 5-10 साल और जुर्माना 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है। 2024 के कानून में, सर्विस प्रोवाइडर के लिए सज़ा 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना थी। अब इसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जा रहा है। 2024 के कानून में यह भी लिखा था कि प्रोवाइडर को अगले 4 वर्षों तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा। आज, इस संशोधन के तहत उस अवधि को बढ़ाकर 8 साल किया जा रहा है। अंत में, संगठित अपराध करने वालों, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, के मामले में पहले सज़ा 5-10 साल थी। इसे बढ़ाकर 7-10 साल कर दिया गया है और जुर्माना पहले 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, जिसका ज़िक्र प्रधानमंत्री ने वीडियो के माध्यम से भी किया था, वह है तेजी से न्याय सुनिश्चित करना। हम परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। हमने इसके लिए एक समय सीमा भी तय की है। जांच 2 महीने की अवधि के भीतर पूरी की जानी है।”