सावन का महीना शिव पूजन के लिए समर्पित होता है और इस दौरान लोग घर या मंदिर में रुद्राभिषेक करते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर रुद्राभिषेक शुभ मुहूर्त या शुभ तिथि में लिया जाता है तो इसका महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है।
इस संपूर्ण अनुष्ठान में शिवलिंग का जल, दूध या गन्ने के रस के अभिषेक किया जाता है और इस पुण्य आयोजन का शुभ फल लोगों के कम-मस्तिष्क के साथ घर के वातावरण में भी दिखाई देने लगता है।
रुद्राभिषेक में ‘रुद्र’ शब्द भगवान शिव के उग्र लेकिन बेहद दयालु रूप को दिखाता है जबकि ‘अभिषेक’ का अर्थ है स्नान कराना या लेप लगाना। मान्यता है कि सावन के महीने में किया गया अभिषेक सबसे ज्यादा फलदायी होता है। अगर आप भी इस महीने में रुद्राभिषेक का आयोजन करना चाहते हैं तो यहां इसकी शुभ तिथियों के बारे में जरूर जानें।
सावन में किन तिथियों में रुद्राभिषेक करना फलदायी होता है
इस पवित्र अनुष्ठान को आयोजित करने के लिए सावन का कोई भी सोमवार, जिसे चंद्रमा का दिन भी कहा जाता है बहुत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही आप सावन की शिवरात्रि और प्रदोष व्रत के दिन भी रुद्राभिषेक कर सकते हैं।
सावन की किन तिथियों में नहीं करना चाहिए रुद्राभिषेकसावन में कुछ ऐसी तिथियां हैं जिसके लिए मान्यता है कि इस दौरान शिव जी का निवास श्मशान में होता है। जिनमें किसी भी पक्ष की तृतीया, सप्तमी, दशमी हैं। आपको इन तिथियों में भूलकर भी रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए। मुख्य रूप से गृहस्थों को इन दिनों में रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए।
सावन के सोमवार और शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक के लिए किसी भी तरह का विचार करने की आवश्यकता नहीं होती है और यह दिन स्वयं सिद्ध माने जाते हैं, इसलिए इन दिनों में आप रुद्राभिषेक की योजना बना सकते हैं।



