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पेपर लीक बिल पर राज्यसभा में हंगामा, खड़गे बोले- कानून नहीं, परीक्षा व्यवस्था बदलने की जरूरत

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नई दिल्ली :  लोकसभा से पारित होने के बाद Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह कानून पेपर लीक रोकने के लिए नहीं, बल्कि आंदोलन कर रहे छात्रों के गुस्से को शांत करने के लिए लाया गया है।

खड़गे ने कहा कि पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ, लेकिन सरकार का नया संशोधन बिल वास्तविक समाधान देने में सक्षम नहीं है।

‘बिल में कुछ नया नहीं’

राज्यसभा में बोलते हुए खड़गे ने कहा कि इस संशोधन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भारी जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान पहले भी चर्चा में थे, लेकिन इससे परीक्षा प्रणाली की मूल समस्याएं दूर नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि असल सुधार परीक्षा आयोजित करने की पूरी व्यवस्था में बदलाव से आएगा, केवल कानून सख्त करने से नहीं।

2024 में भी उठाई थी सख्त कानून की मांग

खड़गे ने दावा किया कि विपक्ष ने वर्ष 2024 में ही पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की मांग की थी, लेकिन उस समय सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। अब छात्रों के आंदोलन के बाद संशोधन लाया गया है।

PM मोदी से सदन में बयान देने की मांग

विपक्ष के नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में आकर इस पूरे मुद्दे पर बयान देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों की समस्याएं उठाता रहा है और सरकार को जवाब देना चाहिए।

‘छात्र संवाद चाहते थे, लाठी मिली’

खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्र सरकार से संवाद चाहते थे, लेकिन उनके साथ सख्ती की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्रालय को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में उनका स्वागत किए जाने पर भी सवाल उठाए।

बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। इससे पहले जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच भी इस मुद्दे पर बहस हुई, जिसमें कानून-व्यवस्था और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे।