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अगस्‍त में नहीं है एक भी विवाह की शुभ तिथि, ‘शादी के मुहूर्त’ न होने का है यह शास्त्रीय कारण

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हिंदू धर्म में विवाह को एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण संस्‍कार माना गया है। इसलिए जब किसी का भी विवाह होता है, उससे पहले हर रीति-रिवाजों के लिए शुभ मुहूर्त निकाले जाते हैं। हर माह कुछ तिथियां ऐसी होती हैं, जिनमें विवाह किया जा सकता है, मगर अगस्‍त के महीने में विवाह के लिए कोई भी शुभ तिथि नहीं है।इसकी सबसे बड़ी वजह है चतुर्मास का शुरू होना। इसके अलावा कुछ और शास्‍त्रीय कारणों से भी इस माह एक भी विवाह मुहूर्त नहीं हैं।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा के अनुसार, “अगस्त 2026 में विवाह का कोई भी शुद्ध और बड़ा शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्यों के लिए इस पूरे महीने में कोई भी श्रेष्ठ दिन नहीं बन रहा है। इसका कारण ग्रह और नक्षत्र भी हैं।”

विवाह मुहूर्त न होने का शास्त्रीय कारण
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय कुछ विशेष ग्रहों की स्थिति और भगवान श्री हरि विष्णु के शयनकाल के कारण विवाह कार्यों पर रोक रहती है।

चातुर्मास का प्रभाव: शास्त्रीय कारण के अनुसार इस समय हरिशयन काल चल रहा है। भगवान विष्णु के शयन काल में होने के कारण और सूर्य एवं चंद्र गणना के अनुसार बड़े मांगलिक कार्य जैसे विवाह को वर्जित माना गया है। ग्रहों की स्थिति: इस अवधि में भद्रा, सिंहस्थ लग्न का अभाव और भाद्रपद मास के कारण विवाह के लिए शुद्ध मुहूर्त नहीं बन रहे हैं। यही कारण है कि इस महीने में पवित्र फेरे लेने की मनाही होती है।

इस अवधि में क्या करें और क्या न करें
विवाह मुहूर्त न होने के कारण जातकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है:

शादी-ब्याह से बचें: अगस्त के पूरे महीने में किसी भी प्रकार के विवाह या इससे जुड़े कार्यक्रम जैसे- सगाई, रोका, गोदभराई या रिश्‍ता पक्‍का करने आदि से बचें। यदि किसी से शादी की बात चल भी रही है, तो रिश्‍ता पक्‍का करने के लिए किसी भी तरह का आयोजन अभी न करें।

ईश्वर भक्ति में लगाएं मन: यह समय नए सांसारिक रिश्ते की शुरुआत करने के बजाय पहले से बने रिश्तों को मजबूत करने के लिए भगवान की पूजा और उपाय आदि करें।

अतः इस लिहाज से जब न भगवान श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद हो और न ग्रह-नक्षत्रों का साथ हो, तो विवाह जैसे शुभ काम करने से बचना ही अच्छा होता है।