सक्ती :छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से महिला संबंधी शिकायत पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक नवविवाहिता का आरोप है कि वह अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज एवं मानसिक प्रताड़ना की शिकायत लेकर पिछले दो महीने से सक्ती थाने के चक्कर लगा रही है, लेकिन अब तक उसकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई है।
पीड़िता ने 29 मई 2026 को सक्ती थाने में लिखित आवेदन देकर पति, सास और ससुर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि शिकायत के बाद कई सप्ताह बीत जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। पीड़िता पक्ष का कहना है कि थाने पहुंचने पर उन्हें जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है।
अप्रैल में हुई थी शादी, कुछ ही दिनों बाद प्रताड़ना का आरोप
शिकायत के मुताबिक, पीड़िता का विवाह अप्रैल 2026 में जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ क्षेत्र निवासी युवक के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद ससुराल में दहेज को लेकर ताने और मानसिक प्रताड़ना शुरू हो गई।
महिला ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उसे मायके वालों से बातचीत करने से रोका जाता था। इसके अलावा गाली-गलौज, मारपीट और गंभीर धमकियां देने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़िता का दावा है कि उसे जलाकर मारने और फांसी पर लटकाने जैसी धमकियां भी दी गईं।
तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती
लगातार मानसिक दबाव और कथित प्रताड़ना के चलते नवविवाहिता की तबीयत बिगड़ने की बात शिकायत में कही गई है। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में मायके पक्ष के लोग उसे ससुराल से वापस सक्ती लेकर आए।
पीड़िता ने पुलिस को दिए आवेदन में पति, सास और ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अपराध दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
दो महीने बाद भी FIR नहीं, पीड़ित पक्ष ने उठाए सवाल
पीड़िता के परिवार का आरोप है कि 29 मई को शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। परिवार का कहना है कि महिला संबंधी गंभीर शिकायत में यदि समय पर पुलिस कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे पीड़ित महिलाओं के बीच पुलिस व्यवस्था को लेकर भरोसे पर सवाल खड़े होते हैं।
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत के आधार पर तत्काल FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
वरिष्ठ पत्रकार की बेटी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पीड़िता के परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि वह सक्ती के एक वरिष्ठ पत्रकार की बेटी है। परिवार का सवाल है कि यदि एक पत्रकार की बेटी को कथित रूप से अपनी शिकायत पर कार्रवाई के लिए लंबे समय तक थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो आम फरियादियों की शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर क्या स्थिति होगी?
हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से FIR दर्ज नहीं किए जाने के कारणों अथवा शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।
अब बड़ा सवाल
महिला ने गंभीर आरोपों के साथ लिखित शिकायत दी है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ऐसे में अब सवाल यह है कि शिकायत पर पुलिस ने अब तक क्या जांच की है और FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई? मामले में पुलिस की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।



