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सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत पर अखंड सौभाग्य के लिए करें ये 3 उपाय, जरूर पढ़ें यह व्रत कथा

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सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। सावन में जितने भी मंगलवार पड़ते हैं उसमें मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस व्रत को वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। कुंवारी लड़कियां इस व्रत को अच्छे जीवनसाथी की चाह में रख सकती हैं।

ऐसा माना जाता है कि जो भी इस व्रत को करता है और इसके नियमों का पालन करता है उसके जीवन में आने वाली समस्याएं दूर हो सकती हैं।

अगर आप भी अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेना चाहती हैं, तो आपको कुछ उपाय करने चाहिए और इस दिन मंगला गौरी की व्रत कथा का पाठ भी करना चाहिए। इस साल सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। आइए यहां जानें कुछ उपायों के बारे में।

माता गौरी को 16 श्रृंगार चढ़ाएं
अगर आप सावन में मंगला गौरी का व्रत करती हैं तो आप इस दिन माता पार्वती को सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। इस उपाय से आपके वैवाहिक जीवन में आने वाली कोई भी समस्या दूर हो सकती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यही नहीं इस दिन सुहागिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार करके माता गौरी का पूजन करना चाहिए, इससे भी आपके जीवन में सौभाग्य आकर्षित होता है। अगर आप अच्छे जीवनसाथी की चाह में यह व्रत कर रही हैं तो आपको इस दिन माता गौरी को सिंदूर जरूर चढ़ाना चाहिए।

लाल मसूर की दाल का दान करें
अगर आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है जिसकी वजह से वैवाहिक जीवन में समस्याएं बनी रहती हैं, तो मंगला गौरी व्रत के दिन आप जरूरतमंद को लाल मसूर की दाल का दान करें।

इस उपाय से आपकी कुंडली में मंगल की दशा मजबूत हो सकती है और आपके वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली आ सकती है। अगर आपकी शादी में बाधाएं आ रही हैं और रिश्ता बनते-बनते टूट जाता है तो ये उपाय कारगर हो सकता है।

माता गौरी को मालपुए का भोग लगाएं
अगर आप वैवाहिक जीवन में मिठास बढ़ाना चाहती हैं तो आपको सावन के मंगला गौरी व्रत के दिन मालपुए का भोग अवश्य लगाना चाहिए। इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और जीवनसाथी के साथ कोई भी अनबन दूर होती है। यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी के लिए माता गौरी को माल पुए का भोग जरूर लगाएं।

मंगला गौरी व्रत कथा
प्राचीन समय की बात है किसी नगर में धर्मपाल नाम का एक सेठ रहता था। धर्मपाल के पास धन संपत्ति की कोई कमी नहीं थी और वह स्वयं भी सर्वगुण संपन्न था।

वह भगवान शिव का परम भक्त था। धर्मपाल की शादी एक गुणवान लड़की से हुई। विवाह के बाद कई वर्षों तक उन्हें कोई संतान प्राप्त नहीं हुई। जिसकी वजह से दोनों पति-पत्नी अत्यंत चिंतित रहने लगा। एक दिन सेठ धर्मपाल और उनकी पत्नी ने नगर के सबसे प्रसिद्द पंडित से संपर्क किया।

उस पंडित ने सेठ और सेठानी को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा उपासना करने की सलाह दी। कालांतर में सेठ धर्मपाल की पत्नी ने विधि विधान से महादेव और माता पार्वती की पूजा उपासना की। सेठ धर्मपाल की पत्नी की कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती प्रकट हुईं और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। माता पार्वती ने संतान प्राप्ति का वरदान उसे दे दिया और यह भी कहा कि उनकी संतान अल्पायु ही पैदा होगी।

एक साल बाद धर्मपाल के घर में एक पुत्र जा जन्म हुआ और तब ज्योतिषियों ने सेठ धर्मपाल को पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से करने की सलाह दी। ज्योतिषियों की सलाह से सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से कर दी और उनके पुत्र को लंबी आयु मिली। जय मां मंगला गौरी, जय भोलेनाथ।

अगर आप भी सावन के मंगला गौरी व्रत के दिन यहां बताए उपाय आजमाएंगी और इस कथा का पाठ करेंगी, तो आपको भी अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलेगा और जीवन के कष्टों से मुक्ति भी मिलेगी।