प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO समिट के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक गए हुए हैं। यहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की है। फरवरी में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों की ओर से इस मुलाकात को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
फरवरी से ही प्रधानमंत्री मोदी ईरानी नेतृत्व के संपर्क में हैं। उन्होंने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित होने से बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
30 जून को ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान भी पीएम मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेजेश्कियान को धन्यवाद भी दिया था।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर सैन्य टकराव
पीएम मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने बाद पहली बार फिर से सैन्य कार्रवाई हुई। अमेरिका ने लारक द्वीप पर ईरानी सैन्य रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई इसलिए जरूरी थी, ताकि ईरान को हार्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने से रोका जा सके।
इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हॉर्मुज के ऊपर अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया।
इसके बाद ईरानी नेतृत्व ने संघर्ष बढ़ाने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर हमला किया गया तो वह हमलावरों को निर्णायक जवाब देगा।
पेजेशकियान ने दी थी कड़े जवाब की चेतावनी
SCO शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले भी पेजेश्कियान ने कहा था कि ईरान किसी भी तरह की आक्रामकता का जवाब पूरी ताकत और दृढ़ता के साथ देगा। उनके इस बयान को अमेरिका के लिए स्पष्ट चेतावनी के तौर पर देखा गया कि संघर्ष को और बढ़ाने से मध्य पूर्व की स्थिति और खराब हो सकती है।
पेजेश्कियान ने कहा था कि मध्य पूर्व ऐसा क्षेत्र है जिसकी नियति, इतिहास और सभ्यता हजारों साल पुरानी है। उनके मुताबिक, इस क्षेत्र के देशों के बीच हमेशा संवाद, सह-अस्तित्व और विकास की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि शांति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सभ्यता इसी भूमि से विकसित हुई हैं और आज भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।



