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कम नींद सिर्फ थकान नहीं बढ़ाती, दिमाग और हार्मोन पर भी डालती है असर; जानें नुकसान

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नींद शरीर और दिमाग को आराम देने के साथ-साथ उनकी रिकवरी के लिए भी जरूरी है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद नहीं लेने पर इसका असर सिर्फ सुबह की थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ध्यान, याददाश्त, मूड, भूख और शरीर के हार्मोनल संतुलन पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार कम सोने की आदत शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर आलोक चोपड़ा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक 6 घंटे से कम नींद लेता है तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

दिमाग के काम करने के तरीके पर पड़ सकता है असर

लगातार कम नींद लेने से सबसे पहले इसका असर दिमाग की कार्यक्षमता पर महसूस हो सकता है। ध्यान केंद्रित करने और सतर्क रहने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा नई जानकारी को समझने और याद रखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

नींद की कमी से रिएक्शन टाइम धीमा हो सकता है, जिसका असर रोजमर्रा के काम और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ सकता है। कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन और भावनात्मक संवेदनशीलता भी बढ़ सकती है।

दरअसल, नींद के दौरान शरीर और दिमाग की रिकवरी से जुड़ी कई प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में लगातार नींद कम मिलने पर इस प्रक्रिया के लिए मिलने वाला समय भी कम हो जाता है।

हार्मोन और भूख पर भी असर

नींद पूरी नहीं होने पर शरीर के हार्मोनल संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। तनाव से जुड़े कोर्टिसोल का स्तर प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ही भूख और पेट भरा होने का एहसास नियंत्रित करने वाले तंत्र पर भी नींद की कमी का असर पड़ सकता है।

यही वजह है कि कम सोने वाले लोगों को बार-बार कुछ खाने की इच्छा हो सकती है। खासकर ज्यादा कैलोरी या तुरंत ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों की क्रेविंग बढ़ने की समस्या सामने आ सकती है।

लंबे समय तक खराब नींद शरीर के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। साथ ही मांसपेशियों और शरीर के अन्य ऊतकों की रिकवरी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

बदलने लगती हैं रोजमर्रा की आदतें

नींद की कमी का असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं, बल्कि दिनभर के व्यवहार में भी नजर आ सकता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर व्यक्ति को ज्यादा कैफीन लेने की जरूरत महसूस हो सकती है, ताकि थकान और सुस्ती से निपटा जा सके।

वहीं, शरीर में ऊर्जा कम महसूस होने के कारण व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करने का मन भी कम हो सकता है। यहां से एक ऐसा चक्र बन सकता है जिसमें कम नींद → थकान → कम शारीरिक गतिविधि → ज्यादा क्रेविंग → फिर खराब नींद जैसी स्थिति पैदा हो जाए।

हर दिन पर्याप्त नींद क्यों जरूरी?

कभी-कभार कम नींद हो जाना अलग बात है, लेकिन अगर यह आपकी रोज की आदत बन गई है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को रिकवर करने, मानसिक सतर्कता बनाए रखने और रोजमर्रा के काम बेहतर तरीके से करने में मदद करती है।

अगर लंबे समय से नींद पूरी नहीं हो रही है, बार-बार नींद टूटती है या पर्याप्त समय बिस्तर पर बिताने के बावजूद दिनभर अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।