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अनंत चतुर्दशी आज: भगवान विष्णु की पूजा में जरूर पढ़ें ये आरती, जानें पाठ की विधि और धार्मिक मान्यता

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25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और परंपरा के अनुसार अनंत सूत्र भी धारण करते हैं।

अनंत चतुर्दशी के दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु की कथा, मंत्र जाप और आरती करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु की आरती करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

भगवान विष्णु यानी अनंत भगवान की विशेष आरती

ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे।
भक्तों के संकट हरते, दीनों के कष्ट हरे॥

ॐ जय अनंत हरे।

शेष शैया पर सोहे, मस्तक मुकुट धरे।
पीतांबर तन पर सोहे, कर में शंख चक्र धर॥

ॐ जय अनंत हरे।

लक्ष्मी संग विराजे, करती मंगल काम।
जो श्रद्धा से ध्यावें, पूर्ण हों उनके काम॥

ॐ जय अनंत हरे।

14 लोकों के स्वामी, आप अनंत कहलाए।
जो जन आपकी पूजा करें, सुख-समृद्धि वह पाएं॥

ॐ जय अनंत हरे।

अनंत सूत्र जो धारण करें, श्रद्धा मन में लाएं।
हरि की कृपा से उनके, संकट दूर हो जाएं॥

ॐ जय अनंत हरे।

दुख-दरिद्र हर लो, करुणा दृष्टि करो।
भक्ति और सद्बुद्धि देकर, जीवन सफल करो॥

ॐ जय अनंत हरे।

शरण पड़े हैं प्रभु जी, रखिए अपनी लाज।
आप बिना इस जग में, कौन रखे मेरी लाज॥

ॐ जय अनंत हरे, प्रभु जय अनंत हरे।
भक्तों के संकट हरते, दीनों के कष्ट हरे॥

अनंत चतुर्दशी पर करें ‘ॐ जय जगदीश हरे’ आरती

अनंत भगवान की विशेष आरती के साथ भगवान विष्णु की प्रसिद्ध ‘ॐ जय जगदीश हरे’ आरती का पाठ भी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। धार्मिक परंपरा में इस आरती के माध्यम से भगवान विष्णु से सुख, शांति, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
स्वामी तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें पूजा

अनंत चतुर्दशी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का ध्यान करें। इसके बाद भगवान को पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर श्रद्धा के साथ पूजा करें। अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, अनंत चतुर्दशी की कथा और आरती का पाठ किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से भगवान विष्णु की कृपा और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।