नई दिल्ली/न्यूयॉर्क : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से दुनिया भर के यहूदियों को संबोधित करते हुए उनसे डरने के बजाय आत्मविश्वास के साथ खड़े रहने की अपील की। 24 सितंबर को दिए अपने भाषण में नेतन्याहू ने कहा कि वह दौर बीत चुका है, जब यहूदी खुद को असहाय और पीड़ित समझते थे।
नेतन्याहू का यह संबोधन ऐसे समय हुआ, जब उनके भाषण की शुरुआत में कई देशों के प्रतिनिधियों ने विरोध में हॉल से वॉकआउट किया। रिपोर्टों के मुताबिक, 50 से अधिक देशों के 100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने उनके भाषण की शुरुआत में सदन छोड़ा। इसके जवाब में नेतन्याहू ने वहां मौजूद विरोध करने वालों पर तीखी टिप्पणी की।
‘अब हमारे पास अपना देश और सेना है’
नेतन्याहू ने दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ बढ़ते विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद उन्होंने यहूदियों से अपना सिर ऊंचा रखने और आत्मविश्वास के साथ खड़े रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि आज यहूदियों के पास अपना देश और अपनी सेना है और उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जो लोग उनके अनुसार “सच और न्याय” की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें उन ताकतों का सामना करने में साथ आना चाहिए जिन्हें वह साझा सभ्यता के लिए खतरा मानते हैं।
UN में प्रतिनिधियों के वॉकआउट पर भी बोले नेतन्याहू
नेतन्याहू के मंच पर पहुंचते ही कई प्रतिनिधियों ने विरोध में हॉल छोड़ दिया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, कई अरब और मुस्लिम देशों के प्रतिनिधिमंडल भी वॉकआउट में शामिल थे। वहीं, इजरायल समर्थक दर्शकों ने नेतन्याहू के समर्थन में नारे लगाए।
वॉकआउट करने वालों पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने उन्हें “नैतिक कायर” कहकर संबोधित किया और कहा कि अगर हॉल में ऐसे लोग अभी भी मौजूद हैं तो वे बाहर जा सकते हैं।
गाजा युद्ध और ईरान पर भी रखा इजरायल का पक्ष
अपने भाषण में नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को इजरायल के लिए बड़ा खतरा बताते हुए सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया।
गाजा में इजरायल पर लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को भी नेतन्याहू ने खारिज किया। उन्होंने इसे “सदी का सबसे बड़ा झूठ” बताया और कहा कि इजरायल ने नरसंहार नहीं किया बल्कि इसे रोकने की कोशिश की। ये नेतन्याहू के अपने दावे हैं, जबकि इजरायल के गाजा अभियान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोप और आलोचनाएं जारी हैं।



