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सेंट जेवियर स्कूल POCSO केस में बड़ा अपडेट, प्राचार्या को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

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बिलासपुर :  बिलासपुर के सेंट जेवियर स्कूल से जुड़े POCSO मामले में स्कूल की प्राचार्या को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। डिवीजन बेंच ने चार्जशीट और आगे की आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राचार्या ट्रायल के दौरान अपने सभी कानूनी आधार और आपत्तियां रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

मामले के अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक नाबालिग छात्रा के साथ कथित यौन अपराध की घटना हुई थी। छात्रा ने आरोप लगाया था कि उसने घटना की जानकारी स्कूल की प्राचार्या और दो शिक्षकों को दी, लेकिन कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद छात्रा के पिता की शिकायत पर सिरगिट्टी थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के साथ POCSO एक्ट के तहत भी आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया।

प्राचार्या ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?

प्राचार्या की ओर से हाईकोर्ट में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि मामले के मुख्य आरोपी राहुल बंगारू ने 9 जुलाई 2025 को ही स्कूल से इस्तीफा दे दिया था, जबकि कथित घटना 14 दिसंबर 2025 की बताई गई है।

याचिका में कहा गया कि घटना के समय राहुल स्कूल में प्राचार्या के नियंत्रण या पर्यवेक्षण में नहीं था। इसी आधार पर प्राचार्या की ओर से POCSO एक्ट की धारा 21 के तहत उन पर लगाई गई जिम्मेदारी को चुनौती दी गई और चार्जशीट समेत आगे की आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई।

हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?

हाईकोर्ट ने कहा कि राहुल बंगारू के इस्तीफे की तारीख और पीड़िता ने कथित घटना की जानकारी प्राचार्या को दी थी या नहीं—ये दोनों विवादित तथ्य और साक्ष्य से जुड़े प्रश्न हैं।

कोर्ट ने माना कि ऐसे तथ्यों का अंतिम निर्धारण BNSS की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट की कार्यवाही में नहीं किया जा सकता। इन मुद्दों पर साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में ही किया जाना उचित होगा।

इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने प्राचार्या की याचिका निरस्त कर दी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें ट्रायल कोर्ट के समक्ष अपनी सभी आपत्तियां और कानूनी आधार उठाने की स्वतंत्रता दी है।

व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए भी विकल्प

हाईकोर्ट ने प्राचार्या को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांगने के लिए भी ट्रायल कोर्ट में आवेदन करने की स्वतंत्रता दी है। इसके लिए वह BNSS की धारा 228 के तहत उचित आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं।

इस तरह हाईकोर्ट ने फिलहाल चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए मामले से जुड़े विवादित तथ्यों का निर्णय ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया है।