Home ज्योतिष विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये कथा, भगवान कृष्ण ने इसी...

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये कथा, भगवान कृष्ण ने इसी व्रत से पाया था अनिरुद्ध को

4
0

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणपति की पूजा और व्रत करने से जीवन के विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के विघ्नराज स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि व्रत रखने वाले भक्त को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य और पूजा करने के पश्चात व्रत का पारण करना चाहिए।

धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत की एक पौराणिक कथा भी बताई गई है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी इस व्रत का अनुष्ठान किया था।

उषा ने सपने में देखा था अनिरुद्ध को

पौराणिक कथा के अनुसार, बाणासुर की पुत्री उषा एक बार सो रही थीं। स्वप्न में उन्होंने अनिरुद्ध को देखा। स्वप्न में अनिरुद्ध को देखने के बाद उषा उनके प्रति आकर्षित हो गईं और उनका मन अनिरुद्ध के वियोग में व्याकुल रहने लगा।

उन्होंने अपनी सखी चित्रलेखा से त्रिभुवन में रहने वाले लोगों के चित्र बनवाए। जब चित्रलेखा ने अनिरुद्ध का चित्र बनाया तो उषा ने उन्हें पहचान लिया। उन्होंने अपनी सखी से कहा कि उन्होंने इसी व्यक्ति को स्वप्न में देखा था और उनसे उनका विवाह भी हुआ था।

उषा ने चित्रलेखा से अनिरुद्ध को खोजकर लाने का आग्रह किया। चित्रलेखा को मायावी विद्या का ज्ञान था। वह अनिरुद्ध को खोजते हुए द्वारका पहुंची और उन्हें पहचान लिया। कथा के अनुसार, चित्रलेखा अनिरुद्ध को उनके पलंग समेत उठाकर बाणासुर की नगरी ले गई।

अनिरुद्ध के वियोग में दुखी हुए श्रीकृष्ण

अनिरुद्ध के अचानक गायब होने से उनके पिता प्रद्युम्न बेहद दुखी हो गए। परिवार में शोक का माहौल बन गया। रुक्मिणी भी अपने पौत्र के वियोग में व्याकुल हो उठीं।

भगवान श्रीकृष्ण भी इस घटना से चिंतित थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात लोमश ऋषि से हुई। श्रीकृष्ण ने ऋषि को पूरी घटना बताई और पूछा कि अनिरुद्ध कहां हैं और उन्हें कौन लेकर गया है।

लोमश ऋषि ने बताया गणेश व्रत का महत्व

कथा के अनुसार, लोमश ऋषि ने श्रीकृष्ण को बताया कि बाणासुर की पुत्री उषा की सखी चित्रलेखा अनिरुद्ध को अपने साथ ले गई है और उन्हें बाणासुर के महल में रखा गया है।

ऋषि ने श्रीकृष्ण को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि भगवान गणेश की आराधना और इस व्रत के प्रभाव से श्रीकृष्ण अपने पौत्र अनिरुद्ध को वापस प्राप्त कर सकेंगे।

व्रत के प्रभाव से बाणासुर पर मिली विजय

पौराणिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण ने लोमश ऋषि के बताए अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया और भगवान गणेश की आराधना की। इसके बाद उन्होंने बाणासुर पर विजय प्राप्त की और अनिरुद्ध को वापस लेकर आए।

कथा में बाणासुर की पराजय और उसकी सहस्र भुजाओं के कटने का भी वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह सब भगवान गणेश के व्रत के प्रभाव से संभव हुआ।

संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें कथा

मान्यता है कि विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत जीवन के संकटों और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने के साथ उनकी पौराणिक कथा का श्रवण या पाठ करना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी आराधना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त होता है।