बिलासपुर : आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक को विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में सर्विस रिकॉर्ड यानी ACR के 15 अंक कम दिए जाने का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को अवमानना नोटिस जारी किया है।
मामला बिलासपुर के महर्षि स्कूल रोड निवासी मुकेश कुमार शर्मा से जुड़ा है, जो जिला जांजगीर-चांपा में आबकारी विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने आबकारी उपनिरीक्षक पद के लिए आयोजित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लिया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि सर्विस रिकॉर्ड के 15 अंक कम दिए जाने के कारण उन्हें परीक्षा में अनुत्तीर्ण कर दिया गया।
2017 से 2019 के ACR पर उठे सवाल
मुकेश कुमार शर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने से पहले उन्हें न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए संबंधित ACR के आधार पर की गई कार्रवाई को उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना।
कोर्ट ने 90 दिन में पुनर्विचार का दिया था आदेश
हाईकोर्ट ने संबंधित मामले में अन्य ACR के आधार पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 90 दिनों की समय-सीमा भी निर्धारित की गई थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के मुताबिक, दिसंबर 2025 में आदेश जारी होने के बावजूद निर्धारित समयसीमा के भीतर उसका पालन नहीं किया गया। करीब 9 महीने तक कार्रवाई नहीं होने के बाद याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवमानना याचिका दायर की।
आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट के आदेशों का समय पर पालन नहीं होने के कारण अवमानना याचिकाओं की संख्या बढ़ रही है। इससे न्यायालय का महत्वपूर्ण समय ऐसे मामलों में खर्च होता है और अन्य मामलों की सुनवाई प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के आदेश का निर्धारित समय में पालन नहीं किए जाने पर उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
अब इस मामले में दोनों अधिकारियों के जवाब और हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर नजर रहेगी।



