पितृ पक्ष में सोमवार को दशमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन पूर्वजों का निधन किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध दशमी तिथि पर किया जाता है। सोमवार को दशमी तिथि देर रात 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। वहीं पुष्य नक्षत्र रात 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
दशमी श्राद्ध, सोमवार और पुष्य नक्षत्र के इस संयोग को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पितरों का विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। दशमी तिथि के श्राद्ध को लेकर यह भी मान्यता है कि इससे घर में धन-संपदा और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, इस विशेष संयोग में कुछ धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
हाथी की परछाई में तर्पण की मान्यता
यदि सोमवार को किसी पूर्वज का श्राद्ध करना है और आसपास किसी महावत के पास हाथी मौजूद है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार हाथी की परछाई वाले स्थान पर बैठकर पितरों के निमित्त तर्पण किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
यदि आसपास हाथी उपलब्ध न हो तो मिट्टी से बनी हाथी की प्रतिमा श्राद्ध स्थल पर रखकर धार्मिक विधि पूरी करने की परंपरा बताई गई है।
परीक्षा में एकाग्रता के लिए चांदी का उपाय
मान्यता के अनुसार, यदि मेहनत करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते या परीक्षा के समय याद की हुई बातें भूल जाती हैं, तो सोमवार को घर से बाहर निकलते समय चांदी का चौकोर टुकड़ा जेब में रखने का उपाय किया जा सकता है।
पितरों की संतुष्टि के लिए खीर की आहुति
पितरों की संतुष्टि और उनके आशीर्वाद की कामना के लिए सोमवार को स्नान आदि के बाद दूध-चावल की खीर तैयार करने की बात कही गई है। इसके बाद गोबर के उपले की अग्नि में पितरों के निमित्त खीर की आहुति देने और उसके बाईं ओर पानी अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है।
कमर दर्द के लिए बताया गया उपाय
कमर से जुड़ी परेशानी के लिए सोमवार को विधारा की जड़ का छोटा टुकड़ा ताबीज में रखकर कमर पर बांधने का उपाय बताया गया है। यदि कमर पर बांधना संभव न हो तो इसे गले में पहनने की बात कही गई है। यह एक पारंपरिक धार्मिक उपाय है, इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
पारिवारिक कलह दूर करने के लिए
यदि परिवार में किसी बात को लेकर लगातार अनबन रहती है और मानसिक अशांति बनी रहती है, तो सोमवार को मंदिर में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने के साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति को एक कटोरी चावल दान करने की मान्यता बताई गई है।
दांपत्य जीवन में मधुरता के लिए
पति-पत्नी के बीच लगातार मतभेद या खींचतान बनी रहती है तो सोमवार को थोड़ा दूध लेकर उसमें एक चुटकी शक्कर मिलाकर कुएं में डालने का धार्मिक उपाय बताया गया है। यदि आसपास कुआं उपलब्ध न हो तो घर के बाहर कच्ची मिट्टी में दूध डालकर उसके ऊपर थोड़ी मिट्टी डालने की बात कही गई है।
इंटरव्यू में सफलता के लिए
यदि सोमवार को किसी मल्टीनेशनल कंपनी में इंटरव्यू देने जाना है तो घर से निकलने से पहले दर्पण में अपना चेहरा देखने और मन ही मन भगवान शिव से सफलता की प्रार्थना करने का उपाय बताया गया है।
तरक्की के लिए पंचामृत से शिव पूजन
करियर में तरक्की और अपनी अलग पहचान बनाने की कामना के लिए सोमवार को अपने हाथों से पंचामृत तैयार करने की बात कही गई है। इसके लिए दूध, दही, शहद, गंगाजल और थोड़ी शक्कर मिलाकर पंचामृत तैयार करें। इसके बाद भगवान शिव को पंचामृत अर्पित कर सफलता और उन्नति की प्रार्थना करने की धार्मिक मान्यता है।
सफलता के लिए शिव मंदिर में जल स्रोत
यदि व्यक्ति को लगता है कि सफलता के रास्ते में लगातार रुकावटें आ रही हैं तो सोमवार को शिव मंदिर में जल स्रोत स्थापित करने का धार्मिक उपाय बताया गया है। शिव मंदिरों में शिवलिंग के ऊपर एक पात्र या जल स्रोत से लगातार जल की धारा शिवलिंग पर गिरती रहती है। इसी तरह की व्यवस्था स्थापित करने को धार्मिक दृष्टि से शुभ माना गया है।
प्रेम-विवाह में आ रही अड़चन के लिए उपाय
यदि प्रेम-विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो पुष्य नक्षत्र के दौरान पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने का उपाय बताया गया है। इसके साथ शनिदेव के मंत्र—
“शं ह्रीं शं शनैश्चराय नमः”



