नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में रेप और यौन हिंसा के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अपराध होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुलिस को अपराध की रोकथाम पर प्राथमिकता से काम करना होगा। कोर्ट ने कहा कि रेप किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अपराध रोकने के लिए क्या कर रही है दिल्ली पुलिस?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि यौन अपराधों को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या दिल्ली में अपराधों की निगरानी के लिए वॉर रूम बनाने का कोई प्रावधान है। कोर्ट ने बताया कि कुछ हाई कोर्ट में इस तरह की व्यवस्था की गई है।
सुनवाई के दौरान National Database on Sexual Offenders के जरिए यौन अपराधों में शामिल और संदिग्ध आरोपियों की निगरानी के पहलू पर भी ध्यान देने को कहा गया।
सभी एजेंसियों को मिलकर काम करने की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करें तो स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मामले के हर पहलू पर ध्यान देने को कहा और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि आने वाले हफ्तों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कोर्ट ने कॉलेजों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा। सुनवाई के दौरान बताया गया कि कुछ लोग छात्राओं को परेशान करते हैं और लगातार उनका पीछा या उत्पीड़न करते हैं।
निर्भया कांड का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान 2012 के निर्भया कांड का भी उल्लेख हुआ। कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में बिना अनुमति संचालित खाने-पीने के ठिकाने हैं, जहां असामाजिक तत्वों के जमा होने और कुछ स्थानों पर शराब उपलब्ध होने की बात सामने आई है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने निर्भया मामले के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि आरोपियों के अपराध से पहले खाना खाने और शराब पीने का भी उल्लेख था। कोर्ट ने ऐसे स्थानों और परिस्थितियों पर भी निगरानी की जरूरत बताई।
‘कागजों पर योजना नहीं, जमीन पर काम जरूरी’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध रोकने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। केवल योजनाएं बनाने या कागजी कार्रवाई से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अपराध की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
कोर्ट ने पुलिस बल की कमी होने की स्थिति में नई भर्ती शुरू करने और पुलिसकर्मियों को उचित प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इन व्यवस्थाओं को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है, लेकिन तब तक अपराधों को रोकने के लिए जरूरी कदम जारी रहने चाहिए।
त्योहारों के दौरान विशेष सतर्कता के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को त्योहारों, खासकर दिवाली के आसपास अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध होने के बाद आरोपी को पकड़ना पुलिस की जिम्मेदारी का सिर्फ एक हिस्सा है। अपराध होने से पहले उसे रोकने के लिए पुलिस को सक्रिय व्यवस्था तैयार करनी होगी।
कोर्ट ने दिल्ली-NCR में दिन और रात दोनों समय निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी
महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों और पार्कों में पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करने की बात कही। कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर बेहतर लाइटिंग व्यवस्था को भी अपराध रोकने की रणनीति का हिस्सा माना।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक परिवहन में अकेली यात्रा कर रही महिला की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस को सक्रिय और सतर्क रहना चाहिए।
मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।



