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कांकेर में खदान की 3 पोकलेन फूंकीं, ‘लाल सलाम’ लिखे पर्चे मिले; नक्सली वारदात या कोई और साजिश?

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भानुप्रतापपुर : छत्तीसगढ़ को 31 मार्च 2026 को ‘नक्सल मुक्त’ घोषित किए जाने के बाद कांकेर जिले में सामने आई एक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोहत्तर थाना क्षेत्र के ग्राम चेमल स्थित पुष्प स्टील लिमिटेड की लौह अयस्क खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनें आग लगने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

घटना के बाद मौके से दो पर्चे भी मिलने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें खदान को नियमित रूप से संचालित करने और एक सप्ताह के भीतर मांगें पूरी करने की बात लिखी गई है। पर्चों पर ‘लाल सलाम’ लिखे होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक घटना को नक्सली वारदात के रूप में आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं किया है।

रात में खड़ी थीं मशीनें, सुबह जली मिलीं

जानकारी के मुताबिक, खदान में शाम को काम खत्म होने के बाद मजदूर अपने कैंप और अन्य स्थानों पर चले गए थे। उस समय मशीनें खदान परिसर में खड़ी थीं। अगले दिन सुबह जब मजदूर काम पर पहुंचे तो तीन पोकलेन मशीनें जली हुई हालत में मिलीं।

मशीनों को आग से काफी नुकसान पहुंचा है। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही लोहत्तर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची।

SDOP मौके पर पहुंचे, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

घटना की गंभीरता को देखते हुए SDOP शेर बहादुर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया।

फॉरेंसिक टीम घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मशीनों में आग कैसे लगी और घटना को अंजाम देने वाले लोग कौन थे। आसपास के इलाके में भी जांच और संभावित सुरागों की तलाश की जा रही है।

‘लाल सलाम’ वाले पर्चों से बढ़ा नक्सली कनेक्शन का शक

मामले में घटनास्थल से मिले बताए जा रहे दो पर्चे जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं। जानकारी के अनुसार, पर्चों में खदान का नियमित संचालन करने और एक सप्ताह के भीतर मांगें मानने की बात कही गई है। साथ ही इनमें ‘लाल सलाम’ लिखा हुआ है।

पर्चों की भाषा और घटना के तरीके को देखते हुए नक्सली गतिविधि की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पर्चों के पीछे वास्तव में नक्सली संगठन का हाथ है या किसी व्यक्ति अथवा दूसरे समूह ने नक्सली अंदाज का इस्तेमाल कर घटना को अंजाम दिया है।

पुलिस फिलहाल सभी संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है।

‘नक्सल मुक्त’ घोषित होने के बाद घटना ने बढ़ाई चिंता

वर्ष 2026 में बस्तर क्षेत्र को नक्सल गतिविधियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद नक्सली अंदाज में सामने आई इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक कांकेर जिले में कुछ नक्सली तत्व अब भी सुरक्षा बलों की गिरफ्त से बाहर हैं और उनकी तलाश में लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं।

इसी वजह से पुलिस घटना को सिर्फ सामान्य आपराधिक वारदात मानकर नहीं चल रही है। नक्सली कनेक्शन के साथ-साथ दूसरे संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खदान में आग लगाने के पीछे कौन था और घटनास्थल पर मिले पर्चों का वास्तविक स्रोत क्या है।