रायपुर : छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष पुराने राजनीतिक हथकंडों और वोट बैंक की राजनीति के सहारे आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव में विकास और काम के आधार पर मुकाबला होना चाहिए।
मंत्री वर्मा ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उनके मुताबिक, कांग्रेस को इस प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय अपने काम और विकास के मुद्दों पर जनता के बीच जाना चाहिए।
SIR पर कांग्रेस के रुख को लेकर उठाए सवाल
टंक राम वर्मा ने कहा कि देश में पहले भी कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल के दौरान मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं होती रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती थीं, तब लोकतंत्र को लेकर इस तरह की आपत्तियां क्यों नहीं उठाई जाती थीं।
मंत्री ने आरोप लगाया कि अब जब मतदाता सूची को दुरुस्त करने की बात हो रही है, तो कांग्रेस लोकतंत्र पर खतरे का मुद्दा उठा रही है। उन्होंने इस विरोध को विपक्ष की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा।
कांग्रेस पर चुनावी धांधली के आरोप
मंत्री वर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव की शुचिता पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष देश में होने वाले सकारात्मक कार्यों का विरोध करने की प्रवृत्ति अपनाता है। हालांकि, ये आरोप मंत्री टंक राम वर्मा के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
‘विकास और काम के दम पर चुनाव लड़े कांग्रेस’
कांग्रेस को चुनौती देते हुए टंक राम वर्मा ने कहा कि अब पुराने राजनीतिक तरीकों और वोट बैंक की राजनीति के सहारे चुनावी मुकाबला नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष से विकास कार्यों और अपने प्रदर्शन के आधार पर चुनाव लड़ने को कहा।
मंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में SIR का मुद्दा अब प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है। जहां मंत्री ने पुनरीक्षण प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, वहीं इस मुद्दे पर विपक्ष की आपत्तियों और उनके आधार को भी राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।



