गले में बार-बार कफ जमा होना, लगातार गला साफ करने की जरूरत महसूस होना या बलगम अटका होने जैसा एहसास कई लोगों को परेशान करता है। इसके साथ खांसी, गले में खराश और असहजता भी हो सकती है। सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण, एलर्जी या नाक से निकलने वाले बलगम के गले तक पहुंचने के कारण ऐसी समस्या हो सकती है।
कफ शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। यह सांस की नलियों से धूल, बाहरी कणों और संक्रमण से जुड़े पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। लेकिन जब बलगम गाढ़ा हो जाता है, तो उसे बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। कुछ आसान घरेलू उपाय गले की परेशानी कम करने और बलगम को पतला रखने में मदद कर सकते हैं।
फोर्टिस अस्पताल, नोएडा के पल्मोनोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के निदेशक डॉ. राहुल शर्मा के बताए उपायों के आधार पर जानिए, गले में कफ जमा होने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
गले में जमा बलगम को पतला रखने के लिए दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना उपयोगी हो सकता है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा रहने से बलगम को बाहर निकालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
गुनगुना पानी और गर्म पेय गले को आराम देने में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि, बहुत गर्म पेय पदार्थों से बचें, क्योंकि वे गले को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2. नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें
गले में खराश या जलन महसूस होने पर नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करने से राहत मिल सकती है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में लगभग आधा चम्मच नमक मिलाएं और उससे गरारे करें।
ध्यान रखें कि गरारे करने के बाद पानी को निगलना नहीं है। छोटे बच्चों को यह उपाय तभी कराएं, जब वे सुरक्षित तरीके से गरारे करके पानी बाहर थूक सकते हों।
3. शहद से मिल सकती है खांसी में राहत
गुनगुने पानी में थोड़ा शहद मिलाकर पीने से खांसी और गले की जलन में कुछ राहत मिल सकती है। खासकर खांसी के कारण गले में होने वाली परेशानी को कम करने में शहद मददगार हो सकता है।
महत्वपूर्ण सावधानी: एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद बिल्कुल न दें। शहद खांसी के लक्षणों में राहत दे सकता है, लेकिन यह कफ जमा होने के मूल कारण का इलाज नहीं है।
4. कमरे में नमी बनाए रखें
बहुत शुष्क वातावरण में गले में सूखापन और असहजता बढ़ सकती है। साफ ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल या गर्म शॉवर से बने नम वातावरण में कुछ समय बिताना कुछ लोगों को आराम दे सकता है।
ह्यूमिडिफायर की नियमित सफाई जरूरी है, ताकि उसमें फफूंद या हानिकारक सूक्ष्मजीव न पनपें। उबलते पानी के बर्तन से सीधे भाप लेने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा और सांस की नलियों में जलने का खतरा हो सकता है।
5. धूम्रपान, धूल और प्रदूषण से बचें
सिगरेट का धुआं, धूल और वायु प्रदूषण गले तथा सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। इससे खांसी और बलगम की परेशानी बढ़ सकती है।
ऐसे में धूम्रपान से दूरी बनाएं, धूल वाले वातावरण में उचित बचाव करें और प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियों को सीमित रखने की कोशिश करें।
गले में कफ जमा होने पर कब डॉक्टर को दिखाएं?
अधिकतर मामलों में सर्दी-जुकाम से जुड़ा कफ कुछ समय में ठीक हो जाता है। लेकिन समस्या लगातार बनी रहे या दूसरे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
इन स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करें:
- कफ या खांसी दो सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे।
- खांसी लगातार बढ़ रही हो या बार-बार लौट रही हो।
- बुखार के साथ सीने में दर्द हो।
- बलगम में खून दिखाई दे।
- सांस लेने में परेशानी हो।



