घुटने हमारे शरीर के वजन को संभालने और चलने, उठने-बैठने जैसी गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते हैं। जब वजन बढ़ता है, तो घुटनों के जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव भी बढ़ जाता है। खासकर चलते समय, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते और कुर्सी से उठते समय घुटनों को अधिक भार सहना पड़ता है। पीएसआरआई अस्पताल में निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार डॉ गौरव प्रकाश भारद्वाज, कहते हैं कि लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर जोड़ों में दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर बता रहे हैं कि आर्थराइटिस को कंट्रोल करने के लिए वजन कम करना क्यों है ज़रूरी?
क्या वजन कम करने से आर्थराइटिस का खतरा कम हो सकता है?
डॉ गौरव प्रकाश भारद्वाज, कहते हैं कि वजन कम करने से घुटनों पर पड़ने वाले मैकेनिकल दबाव कम होता है और दर्द को को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वजन कम करने से हर व्यक्ति में आर्थराइटिस को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि उम्र, आनुवंशिक कारण, पुरानी चोट और जोड़ों की स्थिति भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
आर्थराइटिस के मरीजों के लिए कितना वजन कम करना फायदेमंद है?
अगर किसी व्यक्ति का वजन अधिक है और उसे घुटनों में दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या है, तो 5 से 10 प्रतिशत तक वजन कम करना फायदेमंद हो सकता है। इससे घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम करने, दर्द में राहत पाने और चलने-फिरने की क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
डॉ गौरव प्रकाश भारद्वाज, कहते हैं कि घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी डाइट, फिजिकल एक्टिविटी और वजन कंट्रोल करना जरूरी है। जिन लोगों को घुटनों में दर्द रहता है, वे डॉक्टर की सलाह से व्यायाम, शुरू कर सकते हैं। साथ ही, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए। अगर घुटनों में लगातार दर्द, सूजन, अकड़न या चलने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल बढ़ते वजन का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।



